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Greenland: 'चीन वाली कहानी झूठी, सबसे बड़ा खतरा US', ग्रीनलैंड पर ट्रंप की धमकी के बाद बोले डेनमार्क के सांसद

Sat, 10 Jan 2026 08:13 AM IST
शिवम गर्ग वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोपेनहेगन

सार

ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टिप्पणी पर डेनमार्क के सांसद रासमस जारलोव ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि अमेरिका सहयोगी देशों को सैन्य धमकी दे रहा है, जो चौंकाने वाला और अस्वीकार्य है।

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रासमस जारलोव - फोटो : Amar Ujala Graphics
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विस्तार
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ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हालिया टिप्पणियों पर डेनमार्क में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। डेनमार्क की कंजर्वेटिव पार्टी के सांसद रासमस जारलोव ने अमेरिका के रुख को न सिर्फ परेशान करने वाला बल्कि पूरी तरह अस्वीकार्य करार दिया है।

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रासमस जारलोव ने कहा कि यह बेहद चौंकाने वाली बात है कि संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे सहयोगी देश द्वारा सैन्य कार्रवाई की धमकी दी जा रही है। उन्होंने कहा, 'यह अभूतपूर्व है कि आप अपने ही मित्र देशों को धमकाएं ऐसे देशों को, जिन्होंने कभी आपके खिलाफ कुछ नहीं किया और हमेशा वफादार रहे।

दुनिया के देशों के लिए भी खतरे की घंटी
डेनिश सांसद ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर डेनमार्क जैसे देश को इस तरह की आक्रामक भाषा का सामना करना पड़ सकता है, तो यह दुनिया के अन्य देशों के लिए भी खतरे की घंटी है। उन्होंने कहा 'अगर डेनमार्क सुरक्षित नहीं है, तो फिर कोई भी देश सुरक्षित नहीं'। ग्रीनलैंड के संदर्भ में यारलोव ने ट्रंप के तर्कों को पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने साफ कहा कि ग्रीनलैंड की ओर से न तो कोई खतरा है और न ही किसी प्रकार की शत्रुता। उन्होंने जोड़ा “ग्रीनलैंड के मामले में किसी भी तरह का बहाना नहीं बनता, न कोई धमकी है, न दुश्मनी।"
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ग्रीनलैंड में चीन की मौजूदगी पर भी दिया जवाब
चीन को लेकर किए जा रहे दावों पर भी रासमस जारलोव ने सवाल उठाए। उनके अनुसार, ग्रीनलैंड में चीन की मौजूदगी लगभग नगण्य है। उन्होंने कहा कि वहां न तो चीन का कोई दूतावास है, न खनन गतिविधियां, न स्वामित्व और न ही कोई सैन्य ठिकाना। उन्होंने स्पष्ट किया कि ग्रीनलैंड को लेकर चीन से खतरे की बात एक मनगढ़ंत कहानी है। यारलोव ने यह भी याद दिलाया कि अमेरिका को पहले से ही ग्रीनलैंड में सैन्य पहुंच प्राप्त है, लेकिन उसने खुद ही अपनी मौजूदगी को बड़े पैमाने पर कम किया है। कभी जहां अमेरिकी सैनिकों की संख्या करीब 15,000 थी, अब वह घटकर केवल 150 रह गई है—यानी लगभग 99 प्रतिशत की कटौती।

ग्रीनलैंड को हथियाने के लिए ट्रंप की खुली धमकी
गौरतलब है कि ट्रंप ने कहा कि वह ग्रीनलैंड को आसान तरीके से पाना चाहते हैं, लेकिन अगर ऐसा नहीं हुआ तो कठिन रास्ता भी अपनाया जाएगा। उनका दावा है कि ग्रीनलैंड अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बेहद अहम है, क्योंकि वहां खनिज संसाधन हैं और आर्कटिक क्षेत्र में रूस और चीन की सैन्य गतिविधियां बढ़ रही हैं।

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ट्रंप ने कहा कि अगर अमेरिका ने कदम नहीं उठाया तो रूस या चीन ग्रीनलैंड पर प्रभाव जमा सकते हैं, जो अमेरिका के लिए खतरा होगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका किसी भी हालत में रूस या चीन को पड़ोसी नहीं बनने देगा। ट्रंप के अनुसार, जब अमेरिका किसी क्षेत्र का मालिक होता है, तो उसकी रक्षा भी पूरी ताकत से करता है।

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