डेनमार्क की खुफिया एजेंसी ने अमेरिका को लेकर क्या कहा?
डेनिश डिफेंस इंटेलिजेंस सर्विस (रक्षा खुफिया सेवा), जो कि इस देश की दो प्रमुख खुफिया एजेंसियों में से एक है, ने कहा,
इस एजेंसी ने खुफिया मामलों का सार बताती हुई 2025 की रिपोर्ट को बुधवार को ही प्रकाशित किा है। इसमें वॉशिंगटन की ग्रीनलैंड की तरफ बढ़ती दिलचस्पी को लेकर चिंता जताई गई है। बता दें कि ग्रीनलैंड लंबे समय से डेनमार्क के शासन के अंतर्गत आता है। हालांकि, डोनाल्ड ट्रंप लंबे समय से इसे अमेरिका के हिस्से में करने की बात कहते रहे हैं। वे ग्रीनलैंड को खरीदने की पेशकश तक कर चुके हैं।
अमेरिका को लेकर क्यों आशंकित है डेनमार्क?
ट्रंप ने अमेरिका का राष्ट्रपति चुनाव जीतने के बाद से ही ग्रीनलैंड पर कब्जे को लेकर कई बयान दिए हैं। उन्होंने पहले कहा था कि राष्ट्रीय सुरक्षा और पूरी दुनिया में आजादी के लिए, अमेरिका को लगता है कि ग्रीनलैंड का हक और नियंत्रण बेहद जरूरी है। ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के सांसद इसे लेकर एक विधेयक तक लाए थे, जिसमें राष्ट्रपति को बातचीत शुरू करने की ताकत से जुड़े प्रस्ताव थे।
इस साल अगस्त के महीने में खुलासा हुआ था कि ट्रंप से जुड़े तीन अमेरिकी नागरिक ग्रीनलैंड में गुप्त रूप से प्रभाव डालने की कोशिश कर रहे हैं। इसे लेकर तब डेनमार्क के विदेश मंत्री ने अमेरिका के शीर्ष राजनयिक को तलब किया था और उन्हें गोपनीय तरीके से किसी भी तरह की दखलअंदाजी न करने की चेतावनी दे दी थी। इस बीच डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने साफ किया था कि अमेरिका किसी भी दूसरे देश पर कब्जा नहीं कर सकता है।
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