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डेमोक्रेट्स और लेफ्ट को अब भी सता रहा है ट्रंप का डर! बाइडन पर बार-बार लगा रहे हैं आरोप

Thu, 26 Nov 2020 05:29 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन

सार

  • सत्ता हस्तांतरण के लिए राजी होने पर भी हार न मानने का दावा कर रहे हैं ट्रंप
  • रिपब्लिकन पार्टी में सबसे लोकप्रिय नेता हैं ट्रंप, 2024 में फिर से हो सकते हैं राष्ट्रपति उम्मीदवार
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जो बिडेन - फोटो : पीटीआई (फाइल)
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विस्तार
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तमाम संकेतों के मुताबिक अब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप यह मान चुके हैं कि अगले 20 जनवरी के बाद वे देश के राष्ट्रपति नहीं रहेंगे। इसके बावजूद ट्विटर के जरिए दिए जा रहे अपने सार्वजनिक बयानों में वे लगातार कह रहे हैं कि वे हार नहीं मानेंगे। वे यह भी लगातार दोहरा रहे हैं कि जो बाइडन ने ये चुनाव धोखेबाजी और तिकड़मों से जीता है। इस बीच जारी हुए दो ताजा जनमत सर्वेक्षणों ने यह बताया है कि रिपब्लिकन पार्टी में ट्रंप की लोकप्रियता का आज भी कोई सानी नहीं है। ज्यादातर रिपब्लिकन समर्थक इस बात का भी पक्ष ले रहे हैं कि 2024 के चुनाव में ट्रंप को फिर से उम्मीदवार बनना चाहिए।

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पेनिसिल्वेनिया और मिशिगन राज्यों के चुनाव नतीजे प्रमाणित किए जाने के बाद ट्रंप ने संभवतया यह समझ लिया कि अब उनके लिए कोई चांस नहीं है। जैसे ही मिशिगन राज्य के अधिकारियों ने चुनाव नतीजे को प्रमाणित किया, ट्रंप ने आगामी बाइडन प्रशासन को सत्ता हस्तांतरण करने की प्रक्रिया शुरू करने को हरी झंडी दे दी। उसके बाद ह्वाइट हाउस की जनरल सर्विस एडमिनिस्ट्रेटर एमिली मर्फी ने जो बाइडन ‘आभासी (एपेरेंट) निर्वाचित राष्ट्रपति’ कह कर संबोधित किया। ट्रंप की हरी झंडी के बाद लगभग साठ लाख डॉलर के सत्ता हस्तांतरण कोष का इस मकसद से इस्तेमाल करने का रास्ता खुल गया।


उधर जो बाइडन ने ट्रंप के हालिया या पहले के व्यवहार के लिए मुकदमा चलाए जाने की संभावना से इनकार कर दिया है। राष्ट्रपति चुने जाने के बाद मीडिया को दिए गए अपने पहले इंटरव्यू में बाइडन ने कहा कि वे अपने न्याय मंत्रालय ट्रंप या उनके सहयोगियों के खिलाफ जांच कराने के लिए इस्तेमाल नहीं करेंगे। लेकिन एनबीसी टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा- मैंने पढ़ा है कि राज्यों में कई जांच चल रही हैं। उनके बारे में मैं कुछ करने की स्थिति में नहीं हूं।
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इसके पहले वामपंथी वेबसाइट कॉमन ड्रीम्स में मंगलवार को छपा लेखक रॉबर्ट फ्रीमैन का लेख काफी चर्चित हुआ था, जिसमें ट्रंप पर मुकदमा चलाने और उन्हें सजा देने का आह्वान किया गया था। उसमें ट्रंप की मौजूदा हालत की तुलना 1649 में इंग्लैंड के राजा चार्ल्स-एक की स्थिति से की गई थी।

चार्ल्स- एक को उनके घर में नजरबंद कर दिया गया था। जब उन्होंने वहां से भागने की कोशिश की, तो उन्हें सजा-ए-मौत दे दी गई। फ्रीमैन ने लेख में कहा कि ट्रंप को कानून के तहत अधिकतम सजा मिलनी चाहिए, ताकि वे फिर देश में शरारत और अफरातफरी ना मचा सकें। वामपंथी हलकों में इस लेख को बड़े पैमाने पर शेयर किया गया।

हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटवि के डेमोक्रेटिक पार्टी के सदस्य बिल पास्कल ने भी मांग की है कि ट्रंप को जेल भेजा जाए। उन्होंने एक बयान में कहा कि न सिर्फ ट्रंप, बल्कि उनके प्रशासन के सदस्यों के खिलाफ भी पूरी जांच होनी चाहिए और “अपने राष्ट्र और संविधान के प्रति किए गए अपराधों” के लिए उन्हें सजा मिलनी चाहिए। लेकिन जानकारों का कहना है कि जो बाइडेन के ताजा बयान के बाद इस बारे में लगाए जा रहे कयासों पर विराम लग जाएगा।

एक तरफ ट्रंप के प्रति आक्रोश का यह आलम है, तो दूसरी ओर रिपब्लिकन पार्टी में उनकी लोकप्रियता अटूट बनी हुई है। मॉर्निंग कंसल्ट-पोलिटिको जनमत सर्वेक्षण में पार्टी के 53 फीसदी समर्थकों ने कहा कि ट्रंप को फिर 2024 में चुनाव लड़ना चाहिए। लोकप्रियता के लिहाज से इस मामले में रिपब्लिकन पार्टी का कोई दूसरा नेता ट्रंप के आसपास भी नहीं है।

सर्वे में दूसरे नंबर पर उप राष्ट्रपति माइक पेंस आए, जिन्हें 12 फीसदी रिपब्लिकन समर्थक 2024 में पार्टी के उम्मीदवार के रूप में देखना चाहते हैं। तीसरे नंबर पर राष्ट्रपति ट्रंप के बेटे डोनाल्ड ट्रंप जूनियर आए, जिन्हें 8 पीसदी रिपब्लिकन समर्थकों ने अपनी पसंद बताया।

पर्यवेक्षकों का कहना है कि अपनी हार ना मानने के पीछे ट्रंप की रणनीति अपने इन  समर्थकों को गोलबंद रखना है, ताकि वे राजनीति में आगे भी उनकी संभावना बनी रहे। इस लोकप्रियता के बीच डेमोक्रेटिक प्रशासन अगर उनके खिलाफ कार्रवाई की कोशिश करेगा, तो देश में भारी उथल-पुथल मच सकती है।

दूसरी तरफ लेफ्ट खेमा ट्रंप की वापसी से आशंकित है। वाम रुझान वाली पत्रिका द नेशन में छपे एक लेख में कहा गया है कि आपराधिक गतिविधियों के लिए ट्रंप को दंडित ना करने का मतलब होगा उनके फिर से ह्वाइट हाउस पहुंचने का रास्ता खुला रखना। इन प्रतिक्रियाओं से ये साफ है कि ट्रंप राष्ट्रपति रहें या नहीं, अमेरिकी राजनीति में वे एक ताकतवर शख्सियत अभी बने रहेंगे।

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