ब्रिटेन ‘व्यवस्थागत आर्थिक संकट’ में फंस गया है। ये बात खुद ब्रिटिश सरकार ने अपने एक गोपनीय दस्तावेज में स्वीकार की है। इसमें कहा गया है कि यूरोपियन यूनियन से अलगाव और कोरोना वायरस महामारी के दूसरे दौर की वजह से उसकी कमर टूट रही है। ये दस्तावेज कैबिनेट ऑफिस (ब्रिटिश मंत्रिमंडल का कार्यालय) ने तैयार किया है। इसमें आगाह किया गया है कि आने वाले महीनों में ब्रिटेन को दूसरी मेडिकल इमरजेंसियां भी झेलनी पड़ सकती हैं। उनमें सबसे ज्यादा खतरा फ्लू का है। रिपोर्ट के मुताबिक कोरोना वायरस के फैलाव के कारण फ्लू अगले सीजन में अधिक खतरनाक हो सकता है।
इस गोपनीय दस्तावेज में दर्ज जानकारियां यहां के मशहूर अखबार द गार्जियन ने छापी हैं। इसके मुताबिक ब्रेग्जिट (यूरोपियन यूनियन से अलगाव) के बाद देश को आर्थिक संकट से गुजरना पड़ सकता है। उस दौरान बड़े पैमाने पर मजदूरों की हड़तालों का देश को सामना करना पड़ेगा। इस रिपोर्ट को तैयार करने का काम पिछले सितंबर में शुरू हुआ था। इसमें उन 20 स्थितियों का जिक्र है, जो ब्रेग्जिट के कारण देश में पैदा हो सकती हैं। दस्तावेज के मुताबिक ब्रिटेन को तेल सेक्टर, हेल्थ केयर, यात्रा और कानून- व्यवस्था के मोर्चों पर कड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
द गार्जियन के मुताबिक ये दस्तावेज बताता है कि इस समय देश की हालत के बारे में सरकार की अंदरूनी सोच क्या है। कुल सूरत यह बनती है कि देश एक संकट का सामना कर रहा है और दूसरे की चुनौती उसके सामने है। दस्तावेज में जिक्र किया गया है कि पूरी दुनिया और ब्रिटेन में खाद्य पदार्थों की सप्लाई का सिस्टम मौजूदा हाल में बाधित हो चुका है।
2019 में के आखिर में देश में खाद्य पदार्थों का जो भंडार था, उसका काफी हिस्सा कोरोना महामारी के दौरान खत्म हो गया। उसकी भरपाई फिलहाल करना आसान नहीं है। इसमें कहा गया है कि ब्रिटेन में खाने की चीजों की कमी तो नहीं होगी, लेकिन उनकी उपलब्धता घट सकती है, जिससे खाद्य पदार्थों की महंगाई का देश को सामना करना पड़ सकता है। ऐसा हुआ तो, गरीब परिवारों पर इसका ज्यादा बुरा असर देखने को मिलेगा।
दस्तावेज के मुताबिक आर्थिक संकट बढ़ने पर सामुदायिक तनाव और सार्वजनिक अव्यवस्था की स्थितियां पैदा हो सकती हैं। ब्रिटेन में पहले से ब्रेग्जिट से संबंधित हेट क्राइम की आशंका की चेतावनी दी जाती रही है। कैबिनेट ऑफिस ने इस दस्तावेज के बारे में मीडिया को कोई जानकारी देने से इनकार कर दिया। उसके प्रवक्ता ने कहा कि वह लीक हुए दस्तावेजों पर टिप्पणी नहीं करता। लेकिन प्रवक्ता ने कहा कि एक जिम्मेदार सरकार होने के नाते हम अपने को सबसे बुरी स्थितियों के लिए तैयार रखते हैं।
विश्लेषकों का कहना है कि कई बताई गई समस्याएं महामारी और ब्रेग्जिट में आ रही अड़चनों के कारण गंभीर हो गई हैं। देश के सामने अभी ये बड़ा सवाल खड़ा है कि क्या ब्रिटेन और यूरोपियन यूनियन के बीच कोई व्यापार समझौता हो सकता है। इस पर चल रही वार्ता अटकी हुई है। ब्रिटिश सरकार को इस बात की अपेक्षा नहीं थी कि ब्रेग्जिट के कारण इस क्षेत्र में कोई बड़ा बदलाव आएगा।
लेकिन अब ऐसी आशंका खड़ी हो गई है। अब चेतावनी दी गई है कि ब्रेग्जिट के कारण देश में दवाओं के आयात में समस्या आ सकती है, जिसका असर देश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर पड़ सकता है। इसी के मद्देनजर अक्टूबर में सरकार ने आठ करोड़ पौंड के अनुबंधों का एलान किया था, ताकि देश में जरूरी दवाओं की कमी ना हो।
कोरोना महामारी और लॉकडाउन का देश के निजी कारोबार पर बहुत बुरा असर हुआ है। इससे प्राइवेट कंपनियों की ब्रेग्जिट के कारण लगने वाले वित्तीय झटकों की सह पाने की क्षमता पहले ही काफी घट चुकी है। एक अनुमान के मुताबिक देश की पांच फीसदी कंपनियों के वित्तीय रूप से नाकाम हो जाने की आशंका है। कमजोर वर्ग के लोग पहले से सामाजिक सुरक्षा को हासिल करने के लिए संघर्षरत हैं। आगे उनकी हालत और पतली हो सकती है।