फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

WEF: स्विस राष्ट्रपति ने रूस पर बोला हमला, कहा- शांतिपूर्ण देश पर किया क्रूर हमला, अंतरराष्ट्रीय शांति को खतरा

Tue, 17 Jan 2023 06:40 PM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, दावोस

सार

स्विस राष्ट्रपति ने यूक्रेन के साथ लोकतांत्रिक देशों द्वारा दिखाई गई एकजुटता की सराहना की और अफसोस जताया कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) के एक स्थायी सदस्य देश की ओर से आक्रामकता दिखाई गई। 
विज्ञापन
Swiss President Alain Berset - फोटो : Twitter/Alain Berset
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

दुनियाभर में लोकतंत्रों की संख्या बहुत कम हो गई है और लोकतांत्रिकि संस्थानों के कमजोर होने से दुनिया चरम पर है। यह बात मंगलवार को स्विस राष्ट्रपति एलेन बर्सेट ने कही। वह विश्व आर्थिक मंच की वार्षिक बैठक 2023 को संबोधित कर रहे थे। 

विज्ञापन


बर्सेट ने कहा, कुछ लोकतांत्रिक रूप से गठित देशों में भी कानून का शासन खतरे में है और अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में कानून के शासन के भी खत्म होने का खतरा है। उन्होंने कहा कि युद्ध के बाद की व्यवस्था वर्तमान में अपने सबसे बड़े संकट का सामना कर रही है और यूक्रेन पर रूस का आक्रमण एक शांतिपूर्ण देश पर क्रूर हमला है। उन्होंने कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय कानून और बहुपक्षवाद पर भी एक क्रूर हमला है। युद्ध बहुत पीड़ा दे रहा है।

उन्होंने यूक्रेन के साथ लोकतांत्रिक देशों द्वारा दिखाई गई एकजुटता की सराहना की और अफसोस जताया कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) के एक स्थायी सदस्य देश की ओर से आक्रामकता सामने आई हैं, जो कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर (अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के रखरखाव के लिए प्राथमिक जिम्मेदारी) का उल्लंघन करती है। बर्सेट ने कहा कि स्विट्जरलैंड संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अंतरराष्ट्रीय कानून और बहुपक्षवाद को फिर से मजबूत करने का हर संभव प्रयास करेगा। 
विज्ञापन


उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया भर में असमानता बढ़ती जा रही है और असमानता अपने साथ भारी राजनीतिक और सामाजिक आनुषंगिक क्षति (कॉलैटेरेल डैमेज) लाती है। उन्होंने आगे कहा, जिसे हम लोकलुभावनवाद कहते हैं, वह वह बढ़ती असमानता की प्रतिक्रिया है। हम सभी जानते हैं कि अत्यधिक असमानता सामाजिक सामंजस्य को कम करती है। यह आक्रोश पैदा करती है, जिससे हमें बलि का पकरा तलाशना पड़ता है। यह राजनीतिक रूप से जहरीला है जो हमारे लोकतंत्र में विश्वास को खा रहा है। 

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें