रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह शुक्रवार को फिलीपींस के सेबू में 13वीं आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक एडीएमएम-प्लस में अपने कार्यक्रम पूरे करने के बाद दिल्ली के लिए रवाना हो गए। रवाना होने से पहले, राजनाथ सिंह ने फिलीपींस के सेबू में एक गुरुद्वारे और एक हिंदू मंदिर का दौरा किया। वहां उन्होंने भारतीय समुदाय के लोगों से मुलाकात की और प्रार्थना भी की।
बैठक में क्या हुआ?
- यह दौरा 13वीं एडीएमएम-प्लस बैठक में सिंह की भागीदारी के बाद हुआ, जहां उन्होंने आसियान (ASEAN) सदस्य देशों के साथ रक्षा सहयोग को मजबूत करने और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समृद्धि को बढ़ावा देने के प्रति भारत की प्रतिबद्धता पर जोर दिया।
- बैठक में अपने संबोधन के दौरान, रक्षा मंत्री ने भारत और आसियान देशों के युवाओं के बीच आपसी संपर्क, डिजिटल नवाचार और क्षमता निर्माण को मजबूत करने के लिए एक ‘इंडिया-आसियान यूथ ब्रिज’ बनाने का प्रस्ताव रखा।
- सिंह ने क्षेत्रीय सुरक्षा और आतंकवाद-रोधी सहयोग के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को भी दोहराया। उन्होंने आतंकवादी ढांचे से निपटने के भारत के दृष्टिकोण के उदाहरण के तौर पर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का जिक्र किया।
वियतनाम, इंडोनेशिया, तिमोर-लेस्ते, फिलीपींस और अन्य सदस्य देशों की आबादी काफी युवा है, जिससे उन्हें कुछ ऐसे पश्चिमी देशों के साथ प्रतिस्पर्धा करने का मौका मिलता है, जहां की आबादी बुजुर्ग हो रही है। फिलीपींस, जहां एडीएमएम-प्लस संवाद आयोजित किया जा रहा है, दक्षिण-पूर्व एशिया में सबसे युवा आबादी वाले देशों में से एक है।
युवा पीढ़ी को लेकर क्या कहा?
हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए आसियान सदस्य देशों के साथ मिलकर काम करने का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा, 'अगली पीढ़ी को सशक्त बनाने का हमारा दृष्टिकोण इस बैठक के संयुक्त बयान में भी झलकता है। अपने युवाओं को सशक्त बनाकर, हम इस क्षेत्र के लिए एक उज्ज्वल भविष्य की नींव रख रहे हैं।'
क्या है एडीएमएम?
एडीएमएम, आसियान में रक्षा संबंधी परामर्श और सहयोग का सर्वोच्च तंत्र है। एडीएमएम-प्लस एक ऐसा मंच है, जहां आसियान के सदस्य देश (ब्रुनेई, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओ पीडीआर, मलेशिया, म्यांमार, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड, तिमोर-लेस्ते और वियतनाम) तथा इसके आठ संवाद साझेदार (भारत, अमेरिका, चीन, रूस, जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड) सुरक्षा और रक्षा सहयोग को मजबूत करने के लिए एक साथ आते हैं।