श्रीलंका को जिस तरह के आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है, उससे बांग्लादेश में भी चिंता बढ़ी है। श्रीलंका और बांग्लादेश में एक समान बात यह है कि दोनों देशों ने चीन से कर्ज लिया है। श्रीलंका जिस मुश्किल में फंसा उसके पीछे उसका कर्ज के जाल में फंसना भी एक कारण है। उस पर मौजूद कुल विदेशी कर्ज में चीन का भी एक बड़ा हिस्सा है।
बांग्लादेश के मीडिया और सोशल मीडिया में श्रीलंका जैसी हालत यहां भी पैदा होने की जताई जा रही आशंकाओं को देखते हुए चीन को स्पष्टीकरण जारी करना पड़ा है। ढाका स्थित चीनी राजदूत ली जिमिंग ने बुधवार को पत्रकारों से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने साफ किया कि बांग्लादेश किसी प्रकार के कर्ज के जाल में नहीं है। इसके पहले चीनी राजदूत ने बांग्लादेश के विदेश मंत्री एके अब्दुल मोमिन से मुलाकात की थी। चीनी राजदूत की इस सक्रियता को बांग्लादेश में चीनी कर्ज को लेकर गहरा रहे अंदेशों से जोड़ कर देखा जा रहा है।
उधर विदेश मंत्री मोमिन ने भी देश को आश्वस्त करने की कोशिश में एक बयान जारी किया। इसमें उन्होंने कहा कि बांग्लादेश और श्रीलंका की स्थितियों में तुलना करना ठीक नहीं है। मोमिन ने कहा- बांग्लादेश की आमदनी का प्रमुख स्रोत पर्यटन है, जिस पर कोरोना महामारी के दौरान बहुत खराब असर पड़ा। इसके उलट बांग्लादेश की विदेशी मुद्रा की आमदनी का सबसे प्रमुख जरिया निर्यात और विदेशों में करने वाले बांग्लादेशियों की तरफ से भेजी जाने वाली रकम है।
बांग्लादेश को होने वाली विदेशी मुद्रा की आय बहुत बड़ी है
मोमिन ने दावा किया कि निर्यात और बांग्लादेशियों की कमाई से देश को होने वाली विदेशी मुद्रा की आय बहुत बड़ी है। यहां तक कि महामारी के दौरान भी बांग्लादेशी नागरिकों ने विदेश से 25 बिलियन डॉलर की रकम भेजी। वहीं देश का सालाना निर्यात 40 बिलियन से डॉलर से ऊपर रहा। मोमिन ने विदेशी कर्ज को लेकर जताई जा रही आशंकाओं को निराधार बताया। उन्होंने कहा- विदेशी कर्ज की शर्तों को लेकर हम बहुत सतर्क हैं। उन्होंने बताया कि बांग्लादेश के ऊपर जो कर्ज है, उसमें सबसे बड़ा हिस्सा विश्व बैंक, एशियन डेवलपमेंट बैंक और जापान का है। कुल विदेशी कर्ज में चीनी कर्ज का हिस्सा सिर्फ पांच से छह फीसदी के बीच है।
मोमिन ने जिक्र किया कि बांग्लादेश अपनी बेहतर स्थिति के कारण मौजूदा संकट से उबरने में श्रीलंका की मदद कर रहा है। उन्होंने कहा, ‘हमने श्रीलंका को दवाएं भेजी हैं। अब हम उसे अनाज भेजने पर भी विचार कर रहे हैं।’
प्रति व्यक्ति औसत आय में भारत से आगे रहेगा बांग्लादेश
पर्यवेक्षकों ने इस बात से सहमति जताई है कि बांग्लादेश की स्थिति किसी रूप में श्रीलंका जैसी नहीं है। बल्कि इस सिलसिले में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की एक ताजा रिपोर्ट का जिक्र किया है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि बांग्लादेश 2022-23 से लेकर अगले पांच साल तक प्रति व्यक्ति औसत आय में भारत से आगे बना रहेगा। 2021-22 के बारे में इस रिपोर्ट में बताया गया है कि इस वित्त वर्ष में बांग्लादेश की प्रति व्यक्ति औसत आय 1962 डॉलर रही। जबकि भारत में प्रति व्यक्ति औसत आय 1935 डॉलर ही रही।
आईएमएफ ने कहा है कि बांग्लादेश कपड़े का एक बड़ा निर्यातक बन गया है। यह ऐसा उद्योग है जिसमें बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार मिलता है। ऐसे उद्योगों की वजह से बांग्लादेश में औसत आय बढ़ रही है।