ईरान अशांत है। पूरे देश में खामेनेई सरकार के खिलाफ हिंसक आंदोलन जारी है। सत्ता विरोधी इस प्रदर्शन को कुचलने की सरकार की ओर से पूरी कोशिश की जा रही है, लेकिन जनता सड़कों पर लगातार सुप्रीम नेता खामेनेई के खिलाफ नारेबाजी कर रही है। 28 दिसंबर से शुरू हुआ आंदोलन 7 जनवरी के बाद बड़ा रूप ले चुका है। जिसमें अब तक 600 से ज्यादा लोगों की मौत की खबर सामने आई है।
अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी (HRANA) के मुताबिक पूरे देश में फैले इस आंदोलन में कम से कम 646 लोगों की जान जा चुकी है और इस संख्या के और बढ़ने की आशंका है। वहीं बता दें कि यह एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी कई वर्षों से हो रहे प्रदर्शनों के दौरान सही जानकारी देती रही है। यह ईरान के अंदर एक्टिविस्ट्स के एक नेटवर्क पर निर्भर करती है, जो सभी रिपोर्ट की गई मौतों की पुष्टि करता है।
17 दिनों से आंदोलन जारी
बता दें कि 28 दिसंबर को खराब अर्थव्यवस्था, बढ़ती महंगाई और गिरती मुद्रा की कीमत के बाद व्यापारियों का गुस्सा फूट पड़ा और सड़कों पर आकर विरोध प्रदर्शन करना शुरू कर दिया, जिसके बाद यह आंदोलन बढ़ता चला गया। इस विरोध प्रदर्शन में फिर यूनिवर्सिटी के छात्र शामिल हो गए, जिसके बाद देखते ही देखते यह सभी वर्गों में फैल गया और सुप्रीम नेता खामेनेई के खिलाफ नारेबाजी शुरू हो गई। इसके बाद 7 जनवरी को आंदोलन ने हिंसक और उग्र रूप ले लिया, जिसके बाद कई शहर में आगजनी की घटनाएं सामने आई।
9 जनवरी से इंटरनेट और टेलीफोन सेवा पर पाबंदी
ईरान में 7 जनवरी के बाद हालात अचानक बदल गए। निर्वासित युवराज रजा पहलवी की प्रदर्शनकारियों से अपील के बाद विरोध और तेज हो गए। जिसके बाद ईरान प्रशासन ने 9 जनवरी को इंटरनेट और टेलीफोन सेना पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी। जो अभी तक जारी है।
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अमेरिका ने अपने नागरिकों के लिए जारी की एडवाइजरी
इधर, अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने ईरान में जारी प्रदर्शनों और हिंसा के बीच बड़ा सुरक्षा अलर्ट जारी किया है। अमेरिका ने अपने नागरिकों को 'बिना देरी किए' ईरान छोड़ने की सख्त चेतावनी दी है। अपने नागरिकों को सलाह जारी करते अमेरिका ने तुरंत ईरान छोड़ने का आदेश दिया है। अमेरिकी एडवाइजरी में बताया कि पूरे ईरान में विरोध प्रदर्शन तेज और हिंसक हो सकते हैं। बता दें कि कई अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस ने 16 जनवरी तक अपनी सभी उड़ानें रद्द की हुई है। ऐसे में अमेरिका ने अपने लोगों से आर्मेनिया या तुर्किये के रास्ते देश छोड़ने की सलाह दी है।
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