लैटिन अमेरिका और कैरीबियाई द्वीपों में अब कोरोना संक्रमण से मौतों की दर दुनिया में सबसे ऊंची हो गई है। इन देशों में टीकाकरण की स्थिति भी कमजोर है। साथ ही अस्पतालों को कर्मचारियों और ऑक्सीजन सिलेंडरों की कमी का सामना करना पड़ रहा है। इसलिए आशंका जताई गई है कि आने वाले दिनों में इस क्षेत्र में प्रति व्यक्ति मृत्यु दर में और भी बढ़ोतरी हो सकती है।
गौरतलब है कि लैटिन अमेरिका और कैरीबियाई द्वीपों में अब तक औसतन कुल आबादी के दस फीसदी से भी कम लोगों को कोरोना संक्रमण का टीका लग पाया है। हालांकि यहां टीकाकरण पिछले दिसंबर में ही शुरू हो गया था, लेकिन पर्याप्त संख्या में वैक्सीन डोज के उपलब्ध न होने के कारण ये काम अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ पाया। ब्राजील, पेरू और मेक्सिको तो लगभग एक साल से कोविड-19 संक्रमण के हॉटस्पॉट बने हुए हैं। अब अंदेशा है कि इस पूरे इलाके में वैसा ही हाल हो सकता है।
पर्यवेक्षकों के मुताबिक लैटिन अमेरिका और कैरीबियाई द्वीप ऐसे क्षेत्र हैं, जिन्हें दुनिया में सबसे ज्यादा शहरीकृत बताया जाता है। यानी यहां कुल आबादी का सबसे ज्यादा हिस्सा शहरों में रहता है। इन क्षेत्रों की आबादी का औसतन 80 फीसदी हिस्सा शहरों में है। इस कारण शहरों में भीड़भाड़ ज्यादा है। यह भी एक वजह है, जिससे यहां कोरोना संक्रमण का तेजी से प्रसार हुआ है। अब इस क्षेत्र में कोरोना वायरस का लैम्बडा वैरिएंट तेजी से फैल रहा है। इसे अधिक संक्रामक और घातक बताया गया है।
विशेषज्ञों के मुताबिक लैटिन अमेरिका और कैरीबियाई देशों में टेस्टिंग की व्यवस्था भी कमजोर है। कई देशों की सरकारों ने औपचारिक रूप से ये स्वीकार किया है कि उनके यहां संक्रमित लोगों की जितनी संख्या बताई गई है, असल संख्या उससे कहीं ज्यादा है। पैन अमेरिकन हेल्थ ऑर्गनाइजेशन की प्रमुख कारिसा एतियेने ने अमेरिकी न्यूज वेबसाइट एक्सियोस.कॉम से कहा- ‘यह क्षेत्र कोविड-19 से पीड़ित लोगों का मुख्य केंद्र बन गया है। इसलिए इसे टीकाकरण का भी प्रमुख केंद्र बनना होगा।’
लैटिन अमेरिकी और कैरीबियाई देश मोटे तौर पर टीका के लिए चीन और रूस में बने वैक्सीन और एस्ट्राजेनेका कंपनी की वैक्सीन पर निर्भर रहे हैं। लेकिन इनकी सप्लाई पर्याप्त संख्या में नहीं हो पाई है। यह भी देखा गया है कि चीन में बनी वैक्सीन साइनोवैक लैम्बडा वैरिएंट का संक्रमण रोकने में कम प्रभावी हो रही है। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक चिली और उरुग्वे जैसे देशों में टीकाकरण की दर अच्छी रही है, इसके बावजूद वहां नए संक्रमण के मामले बढ़े हैं। इन दोनो देशों में 50 फीसदी से ज्यादा आबादी का टीकाकरण हो चुका है।
उधर मेक्सिको, अर्जेंटीना, होंडूरास, ग्वाटेमाला और ब्राजील में टीकाकरण की दर कम है। अब इन देशों में कोरोना संक्रमण के साथ ही ब्लैक फंगस संक्रमण के मामले भी सामने आ रहे हैं। ये समस्या चिली और उरुग्वे में भी देखने को मिल रही है। लैटिन अमेरिकी देशों में एक ट्रेंड यह भी देखने को मिला है कि वहां के धनी-मानी लोगों ने अमेरिका जाकर फाइजर या मॉडेरना कंपनियों के वैक्सीन लगवाई। लेकिन उससे संक्रमण का फैलाव रोकने में मदद नहीं मिली है। कुल स्थिति चिंताजनक होती जा रही है।