अपने से पूछे सवालों का फेसबुक साफ जवाब नहीं देता। इसे ऐसे समझे, कोई आदमी अपनी पत्नी से पूछे कि 'क्या तुमने आज घर साफ किया?' तो जवाब में पत्नी कहे कि मैं घर की सफाई को पूरी प्राथमिकता देती हूं।' जवाब से पति नहीं समझ पाएगा कि आज घर साफ हुआ या नहीं? विवादित मुद्दों पर फेसबुक के जवाब भी ऐसे ही होते हैं।
पूर्व कर्मचारी सोफी झांग से जानिए विवादों पर कैसे हथकंडे अपनाता है फेसबुक
तीन साल फेसबुक की डाटा साइंटिस्ट रही सोफी झांग को 2020 में फेसबुक ने नौकरी से निकाल दिया था। इसकी वजह कई देशों के चुनाव को फेसबुक प्लेटफार्म के दुरुपयोग से प्रभावित करने और फेसबुक द्वारा सब कुछ जानते हुए भी मामले को दबाने के सोफी की वजह से हुए खुलासों को माना जाता है। सोफी का कहना है कि अगर फेसबुक को चुनाव में धांधली से फर्क पड़ता, तो कम से कम मुझे नौकरी से नहीं निकालता।
फेसबुक छोड़ते समय सोफी के 7,800 शब्दों के विदाई संदेश में फेसबुक द्वारा कई देशों में लोकतंत्र तबाह करने की कारस्तानी सामने आई। भारत, ब्राजील, अज़रबैजान, होंडुरास आदि में चुनावों के समय मतदाताओं की सोच को अभियान चलाकर प्रभावित किया जा रहा था। फेसबुक की पूर्व कर्मचारी सोफी झांग ने एक इंटरव्यू में इस उदाहरण के साथ फेसबुक की कार्यप्रणाली समझाने की कोशिश की।
आपको फेसबुक से क्यों निकाला गया?
मैंने फेसबुक में रहते हुए चुनाव प्रक्रिया को बचाने के लिए जो काम किया उससे काफी खबरें बनीं। मैंने जो खुलासे कि वह मेरा आधिकारिक काम नहीं था। शुरू में फेसबुक ने मेरे काम को सहयोग दिया लेकिन अंततः उसने अपना धैर्य खो दिया।
आपके हाथों पर खून, इसका क्या मतलब?
2016 के अमेरिकी चुनाव में रूस द्वारा फेसबुक के जरिए डाले गए प्रभाव आज भी असर रखते हैं। चुनावों को खुलेआम फेसबुक से प्रभावित किया गया। फेसबुक में रहते हुए मेरे पास जो सूचनाएं आ रही थीं, मैंने उनके अनुसार काम किया। मेरे लिए है यह रोकना असंभव था। मेरे हाथ भी खून से रंगे थे।
खुलासों से कैसे जुड़ी?
मैंने निर्णय लिया कि इन संदिग्ध अभियानों की जांच करनी चाहिए। थोड़े समय में मुझे पता चला कि भारत, ब्राजील और होंडुरास में भी यह हो रहा है। वे सीधे मतदाताओं को प्रभावित कर रहे थे। यह बहुत खराब था।
आपने क्या किया?
मैंने सबसे पहले अपनी कंपनी के भीतर इस बारे में बात की। सभी ने माना कि यह गलत हो रहा है। लेकिन इसे रोकना किसका काम है यह कोई मानने या बताने के तैयार नहीं था। इस सब में एक साल लग गया लेकिन कोई परिणाम नहीं निकला।