इंडोनेशिया और इथोपिया विमान हादसों के बाद एक तरफ पूरी दुनिया बोइंग 737 मैक्स की सेवाएं बंद कर रही थी, वहीं दूसरी ओर अमेरिकी संघीय विमानन प्रशासन (एफएए) कह रहा था कि बोइंग सुरक्षित हैं। अमेरिकी एयरलाइन कंपनियां भी इसे सुरक्षित बता रही थीं। लेकिन वर्जीनिया स्थित एक कंपनी के मार्च में एफएए को डाटा देने के बाद से अचानक एफएए ने भी इनकी सेवाओं पर रोक लगा दी।
वर्तमान में किसी भी विमान को ट्रैक करने के लिए ग्राउंड आधारित सिस्टम का ही इस्तेमाल होता है। जो दुनिया के 30 फीसदी हिस्से तक सीमित है। हालांकि एरिओन पहली ऐसी कंपनी है जो उपग्रह के वैश्विक नेटवर्क के इस्तेमाल से दुनियाभर में विमान संचालन की वास्तविक समय की ट्रैकिंग करती है।
जब 10 मार्च को इथोपिया में विमान हादसा हुआ तब भी एरिओन विमान की स्थिति बताने में सक्षम थी। हालांकि एफएए ने इस दौरान क्रैश विमान के डाटा रिकॉर्डर के आने का इंतजार किया। इस कंपनी का एफएए के विमान सेवाओं को रोकने में बड़ा हाथ है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इथोपिया दुर्घटना वाले दिन एफएए के अधिकारी एरिओन के पास आए ताकि उन्हें कंपनी इससे संबंधित कोई जानकारी दे सके।
कंपनी के चीफ एग्जीक्यूटिव डोन थोमा का कहना है, "दुर्घटना वाले दिन उन्होंने (एफएए अधिकारी) हमसे डाटा को लेकर संपर्क किया, कि आपके पास डाटा है क्योंकि निश्चित तौर पर अफ्रीका में डाटा स्त्रोत नहीं था। तब तक ब्लैक बॉक्स भी बरामद नहीं हुआ था। तो हमने वो डाटा एफएए और एनटीएसबी (नेशनल ट्रांसपोर्टेशन सेफ्टी बोर्ड) को सौंप दिया। ताकि वह डाटा को देख सकें।"
अगले दो दिनों तक कंपनी अधिकारियों ने एफएए के साथ डाटा पर काम किया। पता चला कि क्रैश होने से कुछ मिनट पहले इथोपियन एयरलाइन का विमान ऊपर नीचे हो रहा था, बिलकुल वैसे ही जैसे लायन एयर का विमान हुआ था। ये विमान 28 अक्तूबर को इंडोनेशिया में दुर्घटनाग्रस्त हुआ था।
थोमा का कहना है कि कंपनी ने जो एफएए को डाटा सौंपा है वह जांच का केवल एक हिस्सा है। एफएए के डेनाइल एलवेल भी विमान की सवाएं रोकने के दौरान इस डाटा के बारे में बोल चुके हैं। थोमा ने कहा, "हम दुर्घटनाग्रस्त विमान के जांचकर्ता नहीं हैं। हम डाटा का स्त्रोत हैं। हमने वो उपलब्ध कराया है।" थोमा का कहना है कि एरिओन का सिस्टम विमानों की सुरक्षा के लिए बेहद आवश्क है।
आपके लिए- अमेरिका में विमान बनाने वाली कंपनी बोइंग के मैक्स 737 विमान के सॉफ्टवेयर में खराबी थी। पायलटों ने कई बार शिकायत की लेकिन कंपनी ने कोई कदम नहीं उठाया। पांच महीने के भीतर मैक्स 737 के दो विमान क्रैश हो गए और कुल 346 लोगों की मौत हुई। तभी से इसकी जांच चल रही है और आए दिन नए खुलासे हो रहे हैं।