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शोध में दावा, साइबर बुलिंग से हो सकता है मानसिक आघात और डिप्रेशन का गंभीर खतरा

Thu, 23 Jan 2020 05:06 AM IST
गौरव पाण्डेय वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : पेक्सेल्स
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शोधकर्ताओं ने बताया है कि साइबर बुलिंग का शिकार हुए बच्चों में दूसरों के मुकाबले मानसिक आघात और डिप्रेशन का खतरा ज्यादा गंभीर होता है। उनका कहना है कि साइबर बुलिंग बच्चों में स्ट्रेस डिसॉर्डर को बढ़ावा देता है।

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जर्नल ऑफ क्लीनिकल साइकेट्री में प्रकाशित शोध के नतीजों में इसके सह-लेखक और मियामी मिलर स्कूल ऑफ मेडिसिन के फिलिप डी हार्वे ने बताया, मानसिक समस्याओं की पृष्ठभूमि वाले बच्चों में भी साइबर बुलिंग के दुष्प्रभाव स्पष्ट दिखते हैं और इसका आकलन किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी जोड़ा कि दूसरे अपराधों की तुलना में साइबर बुलिंग ज्यादा खतरनाक है क्योंकि बच्चे आसानी से इसकी जद में आ जाते हैं।

बुलिंग का सबसे खतरनाक तरीका- व्यक्तिगत हमले

शोध के मुताबिक पहले प्रताड़ित हो चुके बच्चों के साइबर बुलिंग का शिकार होने की आशंका भी ज्यादा होती है। इसलिए, शोधकर्ताओं का मानना है कि साइबर बुलिंग के असर का आकलन करते समय बचपन में झेली प्रताड़ना को भी तवज्जो देनी चाहिए। 

उन्होंने बताया कि बुलिंग का सबसे खतरनाक तरीका वह होता है जिसमें इंसान पर व्यक्तिगत हमले किए जाते हैं, जिनसे वह बुरा अनुभव करता है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल सोशल मीडिया पर लगातार बने रहने से साइबर बुलिंग का खतरा नहीं बढ़ता।

मानसिक अस्पताल में हुआ शोध

यह शोध न्यूयॉर्क में वेस्टचेस्टर काउंटी के एक मानसिक अस्पताल में किया गया। इसमें शामिल लोगों को बचपन में प्रताड़ना से संबंधित दो और साइबर पुलिंग से संबंधित एक सवाल पूछा गया। नतीजों में बताया कि 20 प्रतिशत लोग पिछले दो महीने में ही बुलिंग का शिकार हुए। 

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इनमें से आधे लोगों को मैसेज भेजकर तो बाकी को फेसबुक पर प्रताड़ित किया गया। इंस्टाग्राम और चैट रूम में तस्वीरें और वीडियो को वायरल करना बुलिंग के अन्य प्रमुख हथियार हैं।

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