शोधकर्ताओं ने बताया है कि साइबर बुलिंग का शिकार हुए बच्चों में दूसरों के मुकाबले मानसिक आघात और डिप्रेशन का खतरा ज्यादा गंभीर होता है। उनका कहना है कि साइबर बुलिंग बच्चों में स्ट्रेस डिसॉर्डर को बढ़ावा देता है।
शोध के मुताबिक पहले प्रताड़ित हो चुके बच्चों के साइबर बुलिंग का शिकार होने की आशंका भी ज्यादा होती है। इसलिए, शोधकर्ताओं का मानना है कि साइबर बुलिंग के असर का आकलन करते समय बचपन में झेली प्रताड़ना को भी तवज्जो देनी चाहिए।
उन्होंने बताया कि बुलिंग का सबसे खतरनाक तरीका वह होता है जिसमें इंसान पर व्यक्तिगत हमले किए जाते हैं, जिनसे वह बुरा अनुभव करता है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल सोशल मीडिया पर लगातार बने रहने से साइबर बुलिंग का खतरा नहीं बढ़ता।
यह शोध न्यूयॉर्क में वेस्टचेस्टर काउंटी के एक मानसिक अस्पताल में किया गया। इसमें शामिल लोगों को बचपन में प्रताड़ना से संबंधित दो और साइबर पुलिंग से संबंधित एक सवाल पूछा गया। नतीजों में बताया कि 20 प्रतिशत लोग पिछले दो महीने में ही बुलिंग का शिकार हुए।