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Sri Lanka Crisis: श्रीलंका में अब शिक्षकों पर चलेगा विक्रमसिंघे के दमन का डंडा, जानें इसके पीछे की वजह

डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Sun, 23 Apr 2023 06:23 PM IST

सार

इस बार श्रीलंका में तीन लाख 31 हजार से अधिक छात्र एडवांस्ड लेवल एग्जामिनेशन में बैठे थे। यह इम्तिहान 23 जनवरी से एक फरवरी के बीच हुआ। परीक्षा खत्म हुए ढाई महीने गुजर चुके हैं, लेकिन शिक्षकों के विरोध के कारण अभी तक कॉपियों की जांच का काम शुरू नहीं हुआ है।
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रानिल विक्रमसिंघे - फोटो : Social Media

शिक्षकों की हड़ताल के कारण छात्रों की परीक्षा कॉपियों को जांचने का काम रुका हुआ है। इससे यूनिवर्सिटी की प्रवेश परीक्षा में भाग लेने के इच्छुक छात्रों की चिंता लगातार बढ़ रही है। अब राष्ट्रपति विक्रमसिंघे ने शिक्षकों को हफ्ते भर का अल्टीमेटम दिया है। शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों के साथ एक बैठक में उन्होंने धमकी दी कि वे शिक्षा को आवश्यक सेवा घोषित कर देंगे। विक्रमसिंघे ने कहा कि यह कदम उठाने के बाद आंदोनकारी शिक्षकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की राह खुल जाएगी। 


विक्रमसिंघे ने कहा है- ‘जो शिक्षक पिछली बार कॉपी जांचने में शामिल थे, उन्हें अनिवार्य रूप से इस बार भी अपनी सेवा देनी होगी। अगर उन्होंने ऐसा नहीं किया, तो मैं उन पर मुकदमा शुरू कर दूंगा। उनकी संपत्ति भी जब्त की जा सकती है। अगले हफ्ते मैं अटार्नी जनरल से कहूंगा कि वे आपातकालीन नियमों को लागू करने की तैयारी करें।’


इस बार श्रीलंका में तीन लाख 31 हजार से अधिक छात्र एडवांस्ड लेवल एग्जामिनेशन में बैठे थे। यह इम्तिहान 23 जनवरी से एक फरवरी के बीच हुआ। परीक्षा खत्म हुए ढाई महीने गुजर चुके हैं, लेकिन शिक्षकों के विरोध के कारण अभी तक कॉपियों की जांच का काम शुरू नहीं हुआ है। शिक्षकों के आंदोलन का नेतृत्व फेडरेशन ऑफ यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन (फूटा) और कुछ दूसरी शिक्षक यूनियनें कर रही हैं। नियम के हिसाब से इस परीक्षा के नतीजे दो महीने पहले घोषित हो जाने चाहिए थे। 


सरकारी अधिकारियों के मुताबिक अगर राष्ट्रपति ने आपातकालीन नियम लागू किए, तो शिक्षकों पर कार्रवाई के लिए सुरक्षा बलों को व्यापक अधिकार मिल जाएंगे। राष्ट्रपति कई अन्य क्षेत्रों के कर्मचारियों के मामले में ऐसे कदम उठा चुके हैँ। उनमें स्वास्थ्य और रेलवे भी शामिल हैं। इन सेवाओं को सरकार ने आवश्यक सेवा घोषित कर दिया था। 


अधिकारियों के मुताबिक राष्ट्रपति विक्रमसिंघे इस संभावना की भी तलाश कर रहे हैं कि क्या बिना फूटा शिक्षकों की मदद लिए कॉपियों को जंचवाया जा सकता है। शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों के साथ बैठक में राष्ट्रपति का लहजा बेहद सख्त था। राष्ट्रपति ने कहा- ‘शिक्षकों से कह दीजिए कि अगर वे टकराव चाहते हैं, तो हम भी टकराव के लिए तैयार हैं। लेकिन कोई भी छात्रों की शिक्षा को बंधक बना कर नहीं रख सकता।’


फूटा सरकार के इस ऑफर को कई बार ठुकरा चुका है कि शिक्षक पहले कॉपियों की जांच शुरू करें, उसके बाद उनसे टैक्स बढ़ोतरी के मुद्दे पर बातचीत की जाएगी। उधर शिक्षा मंत्री सुशील प्रेमाजयंता ने आरोप लगाया है कि कुछ उग्रवादी तत्व कॉपियों की जांच में हो रही देर से बने हालात का फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं।

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