बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य में तंजानिया के झंडे वाले कार्गो जहाज 'तिहामाह' पर हुए कथित हूती हमले में तीन क्रू मेंबरों की मौत ने लाल सागर के समुद्री मार्गों को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है। यमनी सूत्रों के मुताबिक, मृतकों में दो पाकिस्तानी, एक इंडोनेशियाई नागरिक समेत चार लोग शामिल हैं। हूतियों ने अभी हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव जारी है। ट्रंप ने ईरान पर आर्थिक दबाव की बात कही है, जबकि तेहरान ने सीधी बातचीत से इनकार करते हुए बिचौलियों के जरिए संदेशों के आदान-प्रदान की बात कही है। ईरान ने अमेरिका से भारी मुआवजे और फ्रीज की गई संपत्तियां जारी करने की मांग की है। दूसरी ओर, हूतियों ने सऊदी जहाजों पर अपने हमलों को यमन पर सऊदी कार्रवाई की प्रतिक्रिया बताया है।
क्या यह हूतियों का लंबे समय बाद पहला हमला है?
अगर हमले की पुष्टि हो जाती है, तो तंजानिया के झंडे वाले जहाज 'तिहामाह' पर हुआ यह हमला फरवरी के अंत में ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद शुरू हुए मध्य पूर्व संघर्ष के दौरान हूतियों का पहला हमला होगा। यह घटना ऐसे समय हुई है, जब हूतियों ने सऊदी अरब की घेराबंदी के जवाब में लाल सागर में सऊदी अरब के खिलाफ नौसैनिक नाकाबंदी की घोषणा किए करीब एक महीना हो चुका है। हालांकि, रॉयटर्स के अनुसार, रियाद ने इस बात से इनकार किया है कि उसने यमन की कोई घेराबंदी की थी।
बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य, जिसे समुद्री परिस्थितियों और इसके ऐतिहासिक महत्व के कारण 'आंसुओं का द्वार' (Gate of Tears) भी कहा जाता है, इन दिनों खास चर्चा में है। इसकी अहमियत इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य बंद है। ईरान समर्थित यमनी सशस्त्र समूह हूती कई बार बाब अल-मंदेब से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही बाधित करने की धमकी दे चुका है। यह जलमार्ग वैश्विक व्यापार के लिए बेहद अहम है और इसके जरिए दुनिया का करीब 12 प्रतिशत व्यापार होता है।
इस जलमार्ग से रोज कितने जहाज गुजर रहे हैं?
केप्लर (Kpler) के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले सप्ताह बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य से रोजाना औसतन 32 जहाज गुजरे। रॉयटर्स के अनुसार, नाकाबंदी से पहले यहां से प्रतिदिन औसतन 50 जहाज गुजरते थे। बाब अल-मंदेब अपने सबसे संकरे हिस्से में करीब 30 किलोमीटर चौड़ा है। यह उत्तर-पूर्व में अरब प्रायद्वीप पर स्थित यमन और पश्चिम में अफ्रीका के इरिट्रिया तथा जिबूती के बीच स्थित है।
होर्मुज को लेकर ट्रंप ने ईरान के साथ बातचीत पर क्या कहा?
महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान के साथ जारी गतिरोध के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान की अर्थव्यवस्था "बहुत खराब स्थिति" में है। उन्होंने संकेत दिया कि होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने को लेकर चल रही बातचीत के बीच उनका प्रशासन ईरान पर बढ़ते आर्थिक दबाव को देख रहा है। न्यूज आउटलेट Axios के अनुसार, ट्रंप ने कहा, 'हम इसे बहुत ज्यादा तूल नहीं दे रहे हैं। हम उनके साथ बस थोड़ी-बहुत बातचीत कर रहे हैं। हम बस ईरान की स्थिति पर नजर रखे हुए हैं। वहां जबरदस्त महंगाई है और उनके पास पैसे भी नहीं हैं।' ट्रंप ने जोर देकर कहा, 'सब ठीक हो जाएगा। हमेशा सब ठीक हो जाता है। यह शतरंज के खेल जैसा है।'
क्या ईरान की अमेरिका के साथ सीधी बातचीत हो रही है?
ईरान ने अमेरिका के साथ सीधी बातचीत होने की खबरों से इनकार किया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने रविवार को कहा कि दोनों देशों के बीच कोई सीधी बातचीत नहीं हो रही है। तेहरान का कहना है कि सीधी बातचीत दोबारा शुरू करने से पहले अमेरिका को जून में हुए अंतरिम समझौते के तहत अपनी जिम्मेदारियां पूरी करनी होंगी। अरागची ने बताया कि ईरान और अमेरिका के बीच संदेशों का आदान-प्रदान बिचौलियों के जरिए हो रहा है।
ईरान ने अमेरिका से कितने मुआवजे की मांग की है?
ईरान ने अमेरिका और इस्राइल के हमलों से हुए नुकसान के लिए वाशिंगटन से 300 अरब डॉलर के मुआवजे की मांग की है। इसके साथ ही उसने अपनी 100 अरब डॉलर तक की फ्रीज की गई संपत्तियों को जारी करने की भी मांग की है। तेहरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की संभावना को कई शर्तों से जोड़ दिया है, जिनमें ये मांगें भी शामिल हैं।
ट्रंप ने ईरान की मुआवजे की मांग पर क्या कहा?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की मुआवजे की मांग को खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि अपने हमलों से हुई मौतों और घायलों के लिए तेहरान को ही जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए।
हूतियों ने सऊदी जहाजों पर हमले को सही क्यों ठहराया?
यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने सऊदी जहाजों पर किए गए अपने हमलों का बचाव करते हुए कहा है कि ये हमले यमन पर सऊदी अरब के हमलों के जवाब में किए गए थे। समूह के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद अब्दुल-सलाम ने कहा कि ये हमले यमन पर हुए हमलों, खासकर 13 जुलाई को सना हवाई अड्डे पर किए गए हमले की प्रतिक्रिया थे।
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हूतियों का सऊदी अरब पर क्या आरोप है?
मोहम्मद अब्दुल-सलाम के मुताबिक, हूती विद्रोहियों ने चार साल तक युद्धविराम का पालन किया और इस दौरान सऊदी अरब पर हमला करने से परहेज किया। हालांकि, उनका आरोप है कि रियाद ने इस अवधि का इस्तेमाल यमन पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के लिए किया। अब्दुल-सलाम ने कहा कि उनका समूह बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन उन्होंने सऊदी अरब पर बातचीत से पीछे हटने और आगे सैन्य कार्रवाई की तैयारी करने का आरोप लगाया।