लॉकडाउन और पुलिस हिंसा के खिलाफ देशभर में हुए आंदोलन के बीच अमेरिका में पिछले साल हत्याओं की संख्या में भी असामान्य बढ़ोतरी हुई। देश में कानून पर अमल से जुड़ी 12 हजार एजेंसियों के ताजा जारी आंकड़ों के मुताबिक सितंबर तक हत्याओं की संख्या में 21 फीसदी का इजाफा हुआ। इसके पहले एक साल में हत्याएं बढ़ने का रिकॉर्ड 1968 में बना था, जब इस संख्या में 12.7 फीसदी की बढ़ोतरी हुई थी। जानकारों का कहना है कि 2020 के अंतिम तीन महीनों के आंकड़े अभी नहीं आए हैं, लेकिन यह साफ है कि बीते साल हत्याओं के मामले में नया रिकॉर्ड बना।
ताजा आंकड़े फेडरल इनवेस्टिगेटिव एजेंसी (एफबीआई) ने जारी किए हैं। वेबसाइट इंटरसेप्ट ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि उसने एफबीआई के आंकड़ों का मिलान अपने सूत्रों से एकत्रित 60 बड़े शहरों के आंकड़ों से किया है। इसके मुताबिक इन शहरों में हत्याओं में 36 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। इसी रिपोर्ट में काउंसिल फॉर क्रिमिनल जस्टिस नाम की संस्था के विश्लेषण का जिक्र है। इसके मुताबिक 34 शहरों में 2019 के मुकाबले 2020 में 30 फीसदी ज्यादा हत्याएं हुईं।
इंटरसेप्ट के मुताबिक हत्याओं की संख्या जानना आसान है, लेकिन यह समझना उतना ही मुश्किल है कि आखिर इनमें इतनी बढ़ोतरी क्यों हुई। नेशनल कमीशन ऑन कोविड-19 एंड क्रिमिनल जस्टिस के निदेशक थॉमस एब्ट ने कहा है कि हत्याओं में वृद्धि एक से ज्यादा कारणों से हुई लगती है। यानी इसके पीछे सिर्फ महामारी या पुलिस हिंसा या लोगों के पास अधिक बंदूकें होना ही वजह नहीं है। ये सारी बातें एक साथ हो रही थीं। संभवतः इनके अलावा भी कई घटनाएं हो रही थीं। उन सबके मिले-जुले असर से हत्याओं की संख्या बढ़ी।
आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि अमेरिका में हत्याओं की दर महामारी आने के पहले ही बढ़ने लगी थी। 2020 की पहली तिमाही में शहरों में हत्याओं की संख्या में सात फीसदी का इजाफा हुआ। पिछले साल अमेरिका में पुलिस के हाथों ब्लैक समुदाय के लोगों की हुई हत्या को भी जानकार इसकी एक वजह मानते हैं। पिछले साल जॉर्ज फ्लॉयड, ब्रियोना टेलर और कुछ अन्य ब्लैक व्यक्ति पुलिस हिरासत के दौरान मारे गए।
एब्ट का कहना है- इन घटनाओं से इस समुदाय के लोगों का पुलिस पर भरोस घटा। इससे इस समुदाय के कुछ लोगों में ये प्रवृत्ति पैदा हुई हो सकती है कि पुलिस पर निर्भर नहीं रहा जा सकता। इसका यह भी मतलब है कि औपचारिक आपराधिक न्याय व्यवस्था के तहत हल होने वाले हिंसक विवादों की संख्या घटी है। इसका अर्थ हुआ कि लोग ज्यादा विवाद बदले की कार्रवाई, हत्या या दूसरी हिंसक गतिविधियों का सहारा लेकर हल करने लगे हैं।
प्रिंसटल यूनिवर्सिटी के समाजशास्त्री पैट्रिक शार्के ने एक अलग अध्ययन में पाया था कि 2019 की तुलना में 2020 के अप्रैल तक 99 शहरों में ऐसी गोलीबारी की संख्या में 75 फीसदी की बढ़ोतरी हुई, जिनमें किसी की जान गई। शार्के का कहना है कि हालांकि हत्याओं की संख्या क्यों बढ़ी इस बारे में अभी कोई स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है, लेकिन इसकी एक वजह लॉकडाउन के कारण बढ़ी घरेलू हिंसा भी है।
बीते साल अमेरिका में फायरआर्म्स (अग्नेयात्रों) की बिक्री में भारी बढ़ोतरी हुई। इसकी वजह महामारी के कारण फैला भय और चुनावों से पहले दक्षिणपंथी समूहों की तैयारी थी। इन हथियारों की बिक्री कुल 39 फीसदी बढ़ी। जानकारों का कहना है कि ज्यादा हथियारों की उपलब्धता का हत्याओं से सीधा संबंध है। ड्यूक यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर फिलिप कुक ने कहा है कि जब हथियारों की बिक्री ज्यादा बढ़ती है, तो लोग विवादों को हल करने के लिए उनका इस्तेमाल भी ज्यादा करने लगते हैँ। पिछले साल हत्याओं की संख्या बढ़ने के पीछे एक कारण यह भी रहा हो सकता है।