वैश्विक महामारी कोरोना की वजह से पूरी दुनिया इस वक्त त्रस्त है और रोजाना इस जानलेवा वायरस से मौतों की संख्या में इजाफा हो रहा है। हर तरफ सिर्फ वेंटिलेटर, पीपीई किट, सुरक्षा उपकरण, ग्लव्स और मास्क ही दिखाई दे रहे हैं। हर कोई कोरोना से बचने के लिए फिलहाल इन्हीं चीजों का इस्तेमाल कर रहा है। हालांकि इन सबके अत्यधिक इस्तेमाल से पर्यावरण प्रचारक काफी चिंतित हैं, क्योंकि उनका मानना है कि सभी चीजों में प्लास्टिक का अधिक इस्तेमाल हो रहा है, ऐसे में आने वाले वक्त में इससे पर्यावरण पर फर्क पड़ सकता है।
एक बार कोरोना का प्रभाव काम होना शुरू होगा तब प्लास्टिक की बनी इन चीजों को नष्ट करना बेहद मुश्किल होगा और पहले से प्रदूषित महासागरों के लिए परेशानी का सबब बनेगा।
इस वक्त जब दुनिया इस महामारी की दवा और टिके को विकसित करने और कोरोना के तेजी से बढ़ते प्रभाव को रोकने में लगी है, ऐसे में दुनियाभर में इससे रोकथाम के लिए लोगों को मास्क, ग्लव्स और पीपीई किटों का इस्तेमाल करने के लिए भी कहा जा रहा है। लेकिन अब समस्या इसके नष्ट करने को लेकर होने लगी है क्योंकि लोग इन सुरक्षा उपकरणों के इस्तेमाल के बाद इन्हें इधर-उधर सड़कों, पार्कों और गलियों में फेंक रहे हैं।