जापान के राष्ट्रीय प्रसारण संगठन 'NHK' ने भी एक वीडियो के माध्यम से समझाया है कि कैसे कोरोना वायरस अब 'माइक्रो-ड्रॉपलेट' संक्रमण का रूप ले चुका है। वीडियो में, जैसे ही एक इंसान छींकता है, तो बूंदें हवा में कई सारी सूक्ष्म बूंदें छोड़ती हैं, जो एक दूसरे इंसान को संक्रमित करने के लिए काफी देर तक हवा में रहती हैं।
कैंब्रिज में एमआईटी के शोधकर्ताओं ने ये देखने के लिए एक हाई स्पीड कैमरा और अन्य सेंसर इस्तेमाल किया कि असल में किसी के खांसने या छींकने के बाद क्या होता है, इसमें उन्होंने पाया कि सांस लेने से गैस का एक धुआं पैदा होता है जिसकी गति बहुत तेज होती है, इस गैस में कुछ अलग-अलग आकार की बूंदें भी होती हैं। इनमें जो सबसे छोटी बूंदें होती हैं वो न सिर्फ सबसे ज्यादा दूर तक जाने की क्षमता रखती हैं बल्कि हवा में भी संक्रमण का खतरा बनाए रखती है।
मौजूदा निर्देश क्या है?
नई रिसर्च से मास्क पहनने के निर्देशों और सलाह में बदलाव आ सकता है। फिलहाल WHO उन्हीं लोगों को मास्क पहनने की सलाह देता है, जिन्हें या तो संक्रमण की आशंका हो या वो संक्रमित लोगों की देखभाल कर रहे हों।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक फिलहाल WHO उन्हीं लोगों को मास्क पहनने की सलाह देता है जिन्हें या तो संक्रमण की आशंका हो या वो संक्रमित लोगों की देखभाल कर रहे हों। विश्व स्वास्थ्य संगठन इस बात पर भी जोर देता है कि मास्क पहनने का फायदा तभी होगा जब इन्हें थोड़े समय में बदला जाए, ठीक से डिस्पोज किया जाए और बार-बार हाथ धोया जाए। ये सलाह उन साक्ष्यों पर आधारित है, जिनमें पाया गया है कि कोरोना वायरस नाक और मुंह के जरिए बाहर आने वाली बूंदों के जरिए फैलता है।