रेस्पिरेटर मास्क नहीं होते
रेस्पिरेटरों को अक्सर मास्क मान लिया जाता है, लेकिन यह विशेष मानकों को पूरा करने वाले व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण होते हैं, जो वायुजनित खतरनाक बैक्टीरिया, वायरस व प्रदूषकों को सांस में मिलेने से रोकने के लिए बनाए जाते हैं। एक एन95 मानक वाला रेस्पिरेटर उच्च प्रवाह दर पर सबसे अधिक घातक आकार के 95 फीसदी कणों को रोकने में सक्षम होता है।
पहले कपड़े के मास्क लगाने को क्यों कहा गया
शुरुआत में कोविड को खांसी और छींक के जरिये फैलने वाला माना गया, जिसके आधार पर मास्क को स्रोत पर नियंत्रण का एक कुशल व किफायती तरीका माना गया। लेकिन, अब साफ है कि वायरस हवा के जरिये फैलता है। सांस लेने और बोलने के दौरान खासतौर पर बंद जगहों पर यह लंबे समय तक हवा मौजूद रह सकता है।
कीमत बनाम सुरक्षा
भारत में रेस्पिरेटर की कीमत चार-पांच हजार रुपये से शुरू होती है। वहीं, आईसीयू में एक दिन का न्यूनतम औसत खर्च करीब 10 हजार रुपये है। जाहिर है यह आईसीयू की तुलना में किफायती है और मास्क के बजाय कई गुना प्रभावी।
वैक्सीन की तरह मुहैया कराएं
संक्रामक रोगों की डॉक्टर व अल्बर्टा विश्वविद्यालय में शोधकर्ता लेयला असदिक, किर्बी इंस्टीट्यूट में ग्लोबल बायोसिक्योरिटी के प्रोफेसर सी रैना मैकइंटायर ने कहा कि सरकारें वैक्सीन की तरह ही रेस्पिरेटर भी मुहैया कराएं या इनकी उपल्ब्धता व वहनीयता को आसान बनाएं तो संक्रमण पर बहुत जल्दी पूरी तरह से काबू पाया जा सकता है। इसके साथ ही वे इस तरफ भी ध्यान दिलाते हैं कि डब्ल्यूएचओ वैक्सीन प्लस रणनीति की वकालत करता है।