दुनिया इस समय महामारी कोरोना वायरस से लड़ रही है। दुनिया में कोविड-19 से 723,279 लोग संक्रमित हो चुके हैं। वहीं वायरस की वजह से चीन की दुनिया में काफी आलोचना हो रही है। हालांकि चीन के राष्ट्रपति और चाइनीज कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) के अध्यक्ष शी जिनपिंग की छवि पर इसका कोई खास प्रभाव नहीं पड़ा है। ऐसे में पार्टी की प्रोपेगैंडा यूनिट इन आलोचनाओं का जवाब देने के लिए फ्रंट पर आ गई है। बता दें कि कोरोना वायरस का सबसे पहला पिछले साल चीन में आया था।
कैनबरा में स्थित एक स्वतंत्र गैर-लाभकारी अनुसंधान संगठन, चीन नीति केंद्र के निदेशक, एडम नी ने बताया कि कैसे चीन ने शुरुआत में वायरस को लेकर जानकारी छुपाई। उन्होने बताया कि पिछले 12 महीनों में कई कारणों की वजह से शी जिनपिंग की लोकप्रियता में कमी आई है।
एडम ने कहा, 'कोविड-19 के बीच शी की लोकप्रियता को लेकर मुझे लगता है कि इसके दो पक्ष हैं। चीनी अधिकारियों द्वारा पूर्व में किए गए गलत कदम और इस संकट के शुरुआती चरणों में काफी दिनों तक सार्वजनिक सुर्खियों से शी की अनुपस्थिति ने उनकी लोकप्रियता को प्रभावित किया है।'
एडम ने कहा, 'शी की राजनीतिक लोकप्रियता को पिछले 12 महीनों में कई मामलों को लेकर चुनौती दी गई है। जिसमें सुस्त अर्थव्यवस्था, हांग कांग में आंदोलन, ताइवान संबंध, चीन और अमेरिका के रिश्ते और चीन की अंतरराष्ट्रीय साथ जैसे मुद्दे शामिल हैं। वहीं कोविड-19 और अन्य चुनौतियों के कारण शी की काफी आलोचना हुई। 2019 की शुरुआत की तुलना में अब राजनीतिक कार्यशैली फीकी हुई है।'
शी और सीसीपी के प्रोपेगैंडा को रेखांकित किया जा रहा है। माओ जेदोंग के समय पर यह जुबानी जंग हुआ करती थी लेकिन अब यह ऑनलाइन और मीडिया प्लेटफॉर्म पर लड़ी जा रही है। चीनी राजनयिकों, मंत्रियों, विभाग के प्रवक्ताओं और अन्य कमियों द्वारा 'वैकल्पिक सत्य' को आगे बढ़ाने के प्रयास अभूतपूर्व स्तर पर पहुंच गए हैं।
चीन ने बेशक अपने देश में ट्विटर और फेसबुक पर प्रतिबंध लगाया हुआ है लेकिन उसका सरकारी तंत्र अपने नापाक संदेशों को फैलाने के लिए इन्हीं प्लेटफॉर्म का व्यापक रूप से उपयोग कर रहे हैं। उनका विलक्षण उद्देश्य वुहान में कोरोनो वायरस के प्रकोप पर प्रतिक्रिया के लिए दोषारोपण करना है।
चीन नीकन, एक साप्ताहिक चीनी सूचना समाचार पत्र है। जिसका प्रकाशन एडम नी और यूं जियांग करते हैं। उन्होंने संक्षेप में कहा, 'चीनी अधिकारियों ने सबसे पहले सूचना को दबाया था। जब उन्हें लगा कि वह इससे दुनिया को संतुष्ट नहीं कर सकते तो उन्होंने प्रचार को दूसरी तरफ मोड़ दिया। वे बताने लगे कि कैसे सरकार ने रिकॉर्ड समय में अस्पतालों का निर्माण किया और सभी शहरों को लॉकडाउन करके निर्णायक रूप से काम किया है।'
एडम ने आगे कहा, 'दो हफ्तों तक गैर राज्य स्वीकृत जानकारी को प्रकाशित करने की अनुमति दी। हालांकि बाद में एक बार फिर सूचनाओं पर उन्होंने दोबारा शिकंजा कसना शुरू कर दिया और सकारात्मक कहानियों को बताने पर जोर दिया। जिसमें फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं के वीरतापूर्ण प्रयासों को उजागर किया गया जबकि रोगियों को होन वाली परेशानियों की जानकारी छुपाई गई।'