एक तरफ पूरी दुनिया कोरोना से जंग लड़ने और अपने नागरिकों को इससे बचाने की जी तोड़ कोशिशों में लगी है, पाकिस्तान के लिए ऐसे वक्त में सियासी उलटफेर ज्यादा अहम हो गया है। प्रधानमंत्री इमरान खान ने सोमवार को कैबिनेट में जबरदस्त बदलाव किए और सबसे ज्यादा विवादों में घिरे राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मंत्री मखदूम खुसरो बख्तियार के मंत्रालय की जिम्मेदारी अब सैयद फखार इमाम को दे दी।
पिछले तीन दिनों से लगातार इमरान सरकार गेहूं और चीनी समेत अरबों रुपये अनाज घोटाले के आरोपों में फंसी है और इस घोटाले में बख्तियार का नाम प्रमुखता से सामने आया है।
पंजाब प्रांत के मुख्यमंत्री की शिकायत पर यह मामला उठा और इसकी जांच एफआईए यानी फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी को सौंपी गई। मामला पुराना है और पाकिस्तान में इमरान खान के चुनावी वादों में इसकी जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने का वादा किया था।
जब इमरान पर चारों तरफ से आरोप लगने लगे तो उन्होंने एजेंसी की रिपोर्ट सार्वजनिक करने को खुद ही कहा। ये रिपोर्ट एजेंसी के डायरेक्टर जनरल वाजिद जिया की अध्यक्षता में बनी कमिटी ने तैयार की है जिसमें घोटाले में कई दिग्गज नेताओं के नाम सामने आए हैं।
हालांकि इमरान खान ने रिपोर्ट सामने आने के बाद रविवार को दावा किया था कि वह किसी के खिलाफ कोई भी कार्रवाई 26 अप्रैल को फारेंसिक टीम की रिपोर्ट आने के बाद ही करेंगे।
लेकिन चौतरफा दबावों में घिरे और अपने ही मंत्री बख्तियार और अपने बेहद करीबी चीनी मिलों के सबसे बड़े कारोबारी और उनकी पार्टी के नेता जहांगीर तारीन का नाम आने के बाद उनकी मुश्किलें बढ़ गईं।
सरकारी प्रवक्ता ने भी ये दावा किया था कि उनकी सरकार पहली ऐसी सरकार है, जिसने ये रिपोर्ट बगैर किसी बदलाव किए सबके सामने रखा है। सरकार ने अपना वादा पूरा किया और पाकिस्तान की किसी सरकार ने ईमानदारी की ऐसी मिसाल नहीं दी। उन्होंने ये भी दावा किया था कि इसमें जो भी कसूरवार होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।
इस वक्त जब देश कोरोना के संकट की वजह से घरों में कैद है, पूरे पाकिस्तान में लॉकडाउन है, तमाम गरीबों और मेहनतकशों के लिए खाने पीने का संकट खड़ा हो गया है ऐसे में गेहूं, चीनी और तमाम अनाजों की कालाबाजारी का सवाल और इसमें पिछले कई महीनों से हो रही हेराफेरी को लेकर हुई जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की मांग उठ रही थी।
पाकिस्तान में कीमतें आसमान पर हैं, आम आदमी के लिए अनाज खरीदना मुश्किल हो गया है, ऊपर से महामारी ने इस संकट को कई गुना बढ़ा दिया है।
ऐसे में इमरान खान अपनी लापरवाहियों और मामले को लेकर निहायत अगंभीर रवैया अपनाने को लेकर निशाने पर रहे हैं। इमरान खान ने पहले चीन से अपनी दोस्ती मजबूत रखने के नाम पर वहां फंसे पाकिस्तानी नागरिकों को नहीं बुलाया, विश्व स्वास्थ्य संगठन के दिशा निर्देशों को गंभीरता से लेने में उन्हें काफी वक्त लगा, ईरान से आए हजारों नागरिकों के लिए उन्होंने कोई कारगर इंतजाम नहीं किया और उन्हें एक जगह भीड़ की तरह रखा गया, जिनमें से कई कोरोना संक्रमित पाए गए, उनकी कोशिश तमाम इलाकों के कोरोना प्रभावित मरीजों को पीओके के मुजफ्फराबाद और मीरपुर में क्वारंटाइन में भेजने की कोशिश है।
इन तमाम आरोप-प्रत्यारोप के बीच इमरान खान ने ऐसे वक्त में यह रिपोर्ट सार्वजनिक करवाई है जब पूरी दुनिया की निगाह कोरोना और इंसानों पर आए इस सबसे बड़े खतरे पर है। इस बीच इस मुद्दे पर कोई बड़ा राजनीतिक शोर शराबा होने की उम्मीद भी नहीं है।
ऐसे में सरकार कैबिनेट में मामूली बदलाव करके और बख्तियार का विभाग बदलकर सबको पाक साफ करने की कोशिश कर रही है। लोगों को ये संदेश देने में लगी है कि उसकी सरकार ईमानदारी की मिसाल है। अब आप कोरोना के संकट की बात कर लीजिए या फिर अंदरूनी मामलों पर सवाल उठा लीजिए।