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कोरोना: महामारी के चलते छह देशों की सत्ता डगमगाई, विश्व के इन नेताओं ने लिए कड़े फैसले और हो गए मजबूत

Mon, 05 Apr 2021 04:23 PM IST
दीप्ति मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन/नई दिल्ली

सार

दुनिया भर में वैश्विक महामारी कोरोना वायरस का कहर जारी है। अब तक 13.19 करोड़ से अधिक लोग इस महामारी की चपेट में आ चुके हैं। जबकि 28.67 लाख से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।
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इनकी लोकप्रियता घटी - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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इससे एक ओर जहां लोगों की जिंदगियां बेपटरी हो गईं हैं। वहीं कई देशों में सरकारों की तकदीर भी महामारी के खिलाफ लड़ाई को लेकर तय हो रही है। यहां पढ़ें कोरोना महामारी के खिलाफ लड़ाई किस नेता की किस्मत चमकी, तो किसकी लोकप्रियता घटी।

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अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप की हार की बड़ी वजहों में कोरोना के खिलाफ लड़ाई में नाकामी भी शामिल है। दुनिया में कोरोना संक्रमण से सबसे अधिक प्रभावित ब्राजील समेत शीर्ष सात देशों में कमजोर कदम उठाने के चलते सरकारें डांवाडोल हो रही हैं। दूसरे सबसे संक्रमित देश ब्राजील में अब तक चार स्वास्थ्य मंत्री बदले जा चुके हैं। स्पेन, फ्रांस, जर्मनी, जापान के राष्ट्र प्रमुख विपक्ष के साथ ही जनता की नाराजगी झेल रहे हैं। इटली में भी प्रधानमंत्री बदलने के केंद्र में कोरोना के खिलाफ कमजोर लड़ाई रही।

इन देशों ने लिए कड़े फैसले

  • न्यूजीलैंड
  • दक्षिण अफ्रीका
  • ऑस्ट्रेलिया
  • ताइवान
  • भारत
  • चीन

वैश्विक महामारी कोरोना वायरस का डटकर मुकाबला करने के चलते न्यूजीलैंड, दक्षिण अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, ताइवान, भारत, चीन समेत कई देशों में राष्ट्र प्रमुखों की ताकत में इजाफा हुआ है। इन देशों के नेताओं ने कड़े फैसले लेकर जनता के बीच अपनी सशक्त छवि पेश की है।

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इन राष्ट्राध्यक्षों की हो रही फजीहत

  • बोल्सनारो : वैक्सीन लगवाने से महिलाओं को निकलेगी दाढ़ी
ब्राजील: लॉकडाउन विरोधी जेयर बोल्सनारो कोरोना को मामूली फ्लू बता चुके हैं। बोल्सनारो ने कहा था कि वैक्सीन लगवाकर कोई मगरमच्छ या दाढ़ी वाली महिला में बदल सकता है। कोरोना से निपटने में नाकामी के चलते चार बार मंत्रिमंडल में बदलाव करना पड़ा। ब्राजील में अब तक 1.3 करोड़ लोग संक्रमित हो चुके हैं, जबकि 3.3 लाख जानें गईं।
  • मैक्राें की लोकप्रियता गिरी
फ्रांस: राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की लोकप्रियता घटकर महज 29 फीसदी रह गई है। पिछले महीने 34 फीसदी लोग पसंद करते थे। जबकि दिसंबर तक उनकी लोकप्रियता 40 फीसदी से ऊपर थी।
  • योशिहिदे सुगा: जनता बोली- महामारी से निपटने के प्रयास धीमे रहे
जापान: कोरोना की दूसरी लहर से निपटने में धीमी प्रतिक्रिया के चलते जापान के नए पीएम योशिहिदे सुगा दबाव का सामना कर रहे हैं। जनमत सर्वे में लोगों ने कहा कि निपटने के प्रयास धीमे रहे। इसके चलते उनकी लोकप्रियता में भी कमी आई है। 4.82 लाख लोग संक्रमित हो चुके हैं और 9,221 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। 
  • मर्केल की पार्टी के समर्थन में भारी कमी आई
जर्मनी: कोरोना महामारी से लड़ाई नाकाम रहने के चलते जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल की एक सर्वे में लोकप्रियता घटकर 22 फीसदी बची है। उनकी सीडीयू-सीएसयू पार्टी का समर्थन 37 फीसदी से गिरकर 25 फीसदी ही बचा है। बता दे कि जर्मनी अब तक 29 लाख के करीब लोग संक्रमित हो चुके हैं। कोरोना से 77,557 लोगों की जान जा चुकी है।

महामारी के दौर में इन नेताओं ने जीता जनता का भरोसा

  • न्यूजीलैंड की पीएम बनीं मिसाल
कोरोना के खिलाफ सबसे बेहतर तरीके से लड़ाई के चलते न्यूजीलैंड की पीएम जेसिंडा अर्डर्न मिसाल बन गई हैं। देश 14 दिसंबर को कोरोना मुक्त हो चुका है। अब वह सतर्कता के लेवल-1 में पहुंच गया।
  • इस्राइल में नेतन्याहू ने फिर जीता भरोसा
इजरायल में भले ही प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के गठबंधन को बहुमत नहीं मिला। लेकिन वे देश के भरोसेमंद नेता हैं। उनके नेतृत्व में देश ने दुनिया में सबसे तेजी से टीकाकरण कर लोगों पर लगी पाबंदियों से ढील दी। 
  • रामफोसा ने पेश की मजबूत छवि
ब्रिक्स देशों में शामिल दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामोफोसा ने कोरोना महामारी के खिलाफ लड़ाई में सख्ती बरतते हुए काबू पाया। उनके नेतृत्व में देश दो लहर से पार पा चुका है। अफ्रीकी मीडिया के मुताबिक, उनकी स्थिति पहले से मजबूत हुई है।
  • ब्रिटिश पीएम ने बदले समीकरण
एक समय बेकाबू हो चुके कोरोना को रोकने के लिए तेजी से टीकाकरण कर प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने अपनी छवि मजबूत की है। जनवरी में नए मरीज 68 हजार हो गए थे, जाे टीकाकरण से अब रोज 3,423 ही बचे हैं।
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मोदी ने दुनिया में पेश की भारत की मजबूत छवि

कोरोना महामारी की पहली लहर के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में सख्त लॉकडाउन लगाने का फैसला किया। साथ ही प्रवासी मजदूरों को उनके घर तक पहुंचाने, गरीब परिवारों तक राशन पहुंचाने और राहत पैकेज की घोषण कर देश को पटरी पर लाने की कोशिश की। वहीं विदेशों में पहले कोरोना के खिलाफ लड़ाई के लिए दवाएं और चिकित्सा उपकरण पहुंचाए। बाद में पड़ोसी और मित्र देशों को वैक्सीन मुहैया कर अपनी एक अलग छवि बनाई है। हालांकि, अब देश में कोविड की दूसरी लहर चल रही है, ऐसे में देखना ये है कि पीएम इससे निपटने के लिए क्या फैसले लेंगे?
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