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आपबीती: लंदन की सारा मधुमेह-लिवर की तकलीफ से पीड़ित, बोलीं- भ्रम न पालें कि आप युवा हैं

Tue, 31 Mar 2020 02:20 AM IST
योगेश साहू वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन।
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लंदन की स्कूल शिक्षिका सारा हॉल - फोटो : Social Media
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मैं सारा हॉल (26) शिक्षक हूं और लंदन में रहती हूं। मुझे मधुमेह की शिकायत है। इस कारण मेरे फेफड़े और लिवर में पहले से तकलीफ है। मार्च की शुरुआत में मैं अस्वस्थ महसूस करने लगी और थकान भी होने लगी। मैंने सोचा पढ़ाने के चलते तनाव से ये हो रहा होगा। तभी मुझे सर्दी जुकाम की भी तकलीफ हो गई। मुझे कोरोना था।

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डॉक्टरों की बात मानी और आखिरकार कोरोना को मात दी। मैंने तुरंत स्वास्थ्य विभाग को फोन लगाया और अपनी तकलीफ बताई। लक्षणों के आधार पर वायरस की आशंका जताई गई। मैं घबराई नहीं लेकिन मेरा शरीर साथ नहीं दे रहा था। मैं दिनभर सोते रहना चाहती थी।

मैंने खुद को शांत किया और काफी मात्रा में तरल पदार्थ लेती रही। इस बीच मुझे सांस लेने में भी थोड़ी तकलीफ हुई। दो दिन बाद मुझे पहले से अच्छा महसूस होने लगा। मेरा बुखार भी पहले की तुलना में कम हो गया था, लेकिन सब कुछ ठीक नहीं था। एजेंसी
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अचानक बिगड़ी हालत, सांस लेना मुश्किल
जब मैं अच्छा महसूस कर रही थी उसी दिन दोपहर में अचानक मेरी हालत बिगड़ गई। मुझे खांसी और कफ के साथ उल्टी होने लगी। मैं होश खोने लगी थी। लगातार खांसी आने से मेरी हिम्मत जवाब देने लगी थी। सांस लेने में तकलीफ होने लगी।

अस्पताल का संसाधन खराब नहीं करना चाहती थी

मुझे विश्वास था कि मैं ठीक हो जाऊंगी। मैं किसी भी हालत में अस्पताल का संसाधन खराब नहीं करना चाहती थी क्योंकि मेरी वजह से किसी गंभीर मरीज को अधिक तकलीफ हो जाती। अगले दिन शाम तक मैंने इंतजार किया लेकिन शाम 7 सात बजे हिम्मत जवाब दे गई फिर भी संघर्ष करती रही ताकि मुझे अस्पताल नहीं जाना पड़े।

डॉक्टरों की बात मानी और जीती जंग
मुझे कोरोना वायरस का डर था। सुबह पांच बजे दोस्त के साथ कार से रॉयल फ्री अस्पताल पहुंची। मेरी कोरोना जांच हुई और रिपोर्ट पॉजिटिव आई। शरीर में पानी की कमी थी इसलिए मुझे जरूरी इलाज के बाद वापस घर भेज दिया गया। मैंने घर पर डॉक्टरों की बताई हर बात मानी। सावधानी बरती और आखिर में मैने कोरोना वायरस को मात दी।
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लापरवाही में ही जकड़ता है वायरस

मेरी उम्र महज 26 साल है। इसलिए युवा लोग इस भ्रम में न रहें कि उन्हें कोरोना नहीं होगा। ये वायरस उम्र देखकर नहीं आता। ये इंतजार करता है कि आप लापरवाही बरतें और आपको जकड़ ले। सुरक्षित रहना है तो सावधानी बरतें और घर पर रहें, यही बचाव है।

स्वस्थ होने के बाद महिला की दो टूक, घर पर रहें तभी सुरक्षित
कोरोना से जंग जीत चुकीं गुजरात की 34 वर्षीय एक महिला ने दो टूक कहा कि बचने का एकमात्र उपाय घर में रहना ही है। उन्होंने विदेश जाने के उस फैसले पर भी अफसोस जताया, जिसके कारण वह इस महामारी की चपेट में आईं। 

अहमदाबाद के अंबावाड़ी की निवासी महिला ने घरों में रहने की अपील की। उन्होंने कहा, महामारी को मात देने के लिए घर में रहने के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं है। घरों में हैं तभी सुरक्षित हैं। उन्हें रविवार को ही अस्पताल से छुट्टी दी गई।

वह फिनलैंड से लौटीं थीं। उन्होंने कहा, मैं पूरी सावधानी के साथ यात्रा पर थी, एन95 मास्क भी लगाया, बार बार हाथ भी धोए, सैनिटाइजर भी इस्तेमाल किया लेकिन फिर भी कोरोना हो गया। इससे बचने का एक मात्र उपाय घर में रहना है।
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