मुझे विश्वास था कि मैं ठीक हो जाऊंगी। मैं किसी भी हालत में अस्पताल का संसाधन खराब नहीं करना चाहती थी क्योंकि मेरी वजह से किसी गंभीर मरीज को अधिक तकलीफ हो जाती। अगले दिन शाम तक मैंने इंतजार किया लेकिन शाम 7 सात बजे हिम्मत जवाब दे गई फिर भी संघर्ष करती रही ताकि मुझे अस्पताल नहीं जाना पड़े।
डॉक्टरों की बात मानी और जीती जंग
मुझे कोरोना वायरस का डर था। सुबह पांच बजे दोस्त के साथ कार से रॉयल फ्री अस्पताल पहुंची। मेरी कोरोना जांच हुई और रिपोर्ट पॉजिटिव आई। शरीर में पानी की कमी थी इसलिए मुझे जरूरी इलाज के बाद वापस घर भेज दिया गया। मैंने घर पर डॉक्टरों की बताई हर बात मानी। सावधानी बरती और आखिर में मैने कोरोना वायरस को मात दी।
मेरी उम्र महज 26 साल है। इसलिए युवा लोग इस भ्रम में न रहें कि उन्हें कोरोना नहीं होगा। ये वायरस उम्र देखकर नहीं आता। ये इंतजार करता है कि आप लापरवाही बरतें और आपको जकड़ ले। सुरक्षित रहना है तो सावधानी बरतें और घर पर रहें, यही बचाव है।
स्वस्थ होने के बाद महिला की दो टूक, घर पर रहें तभी सुरक्षित
कोरोना से जंग जीत चुकीं गुजरात की 34 वर्षीय एक महिला ने दो टूक कहा कि बचने का एकमात्र उपाय घर में रहना ही है। उन्होंने विदेश जाने के उस फैसले पर भी अफसोस जताया, जिसके कारण वह इस महामारी की चपेट में आईं।
अहमदाबाद के अंबावाड़ी की निवासी महिला ने घरों में रहने की अपील की। उन्होंने कहा, महामारी को मात देने के लिए घर में रहने के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं है। घरों में हैं तभी सुरक्षित हैं। उन्हें रविवार को ही अस्पताल से छुट्टी दी गई।
वह फिनलैंड से लौटीं थीं। उन्होंने कहा, मैं पूरी सावधानी के साथ यात्रा पर थी, एन95 मास्क भी लगाया, बार बार हाथ भी धोए, सैनिटाइजर भी इस्तेमाल किया लेकिन फिर भी कोरोना हो गया। इससे बचने का एक मात्र उपाय घर में रहना है।