चीन में बेकाबू हो चुके कोरोनावायरस ने वहां बड़े पैमाने पर बरती गई राजनीतिक-प्रशासनिक लापरवाही को दुनिया के समक्ष उजागर कर दिया है। चीन पर नजर रखने वाले विश्लेषकों का कहना है कि जब वुहान में कोरोनावायरस फैल रहा था, तब वहां की मेयर ने सरकार पर आरोप लगाया तो रोग नियंत्रक अधिकारियों ने नौकरशाहों पर जिम्मेदारी डाल दी। सरकार में बैठे नेताओं ने तो जनता को ही इसके लिए जिम्मेदार ठहरा दिया।
मौत के आंकड़ों और संक्रमितों की संख्या में हो रही बढ़ोतरी के बीच उच्च स्तर पर इस तरह आरोप-प्रत्यारोप वाकई हैरान करने वाले हैं। जानकारों का कहना है कि कोरोना को रोकने में विफल रहे चीन में पहली दफा जनता की नजरों में उनके सरकारी तंत्र की पोल खुल गई है, जिसे बड़े स्तर पर सफलतापूर्वक कार्य करने में दक्ष माना जाता था। चीन के राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अपने कार्यकाल में नौकरशाहों और टेक्नोक्रेट्स से ज्यादा पार्टी काडर को तवज्जो दी है।
इसके चलते पार्टी काडर नौकरशाही पर हावी हो गया है। नौकरशाह ऐसा कोई भी निर्णय लेने से कतराते हैं, जिससे सरकार की आलोचना हो। मशहूर चीनी लेखक और वहां की राजनीति-नौकरशाही पर नजर रखने वाले शु काइझेन का मानना है कि कोरोना वायरस के बेकाबू होने में मौजूदा प्रशासनिक हालात का बड़ा योगदान है। वुहान से फैली महामारी ने स्थानीय सरकार की कमजोर कार्रवाई और नौकरशाहों के मन में शीर्ष स्तर पर बैठे नेताओं के भय को उजागर कर दिया है।