कोरोना वायरस महामारी से जूझ रही दुनिया के लिए एक अच्छी खबर है। अमेरिका की एली लिली कंपनी ने ठीक हुए मरीजों की एंटीबॉडी से कोरोना की दवा तैयार कर ली है और इंसानों पर उसका परीक्षण भी शुरू कर दिया है। पहले चरण में वैज्ञानिक दवा से इंसानों की सुरक्षा और उसको सहन करने की क्षमता का पता लगाएंगे।
कंपनी का कहना है कि उसने कोविड-19 से ठीक हो चुके एक मरीज के खून के नमूने से यह दवा बनाई है। मरीज को फेफड़ों से जुड़ी तकलीफ थी उसी के आधार पर एंटीबॉडी से दवा को तैयार किया गया है। इसका नाम 'LY-CoV555' रखा गया है।
कंपनी का दावा है कि इस दवा के इस्तेमाल से कोरोना वायरस इंसान की स्वस्थ कोशिकाओं में नहीं पहुंच पाएगा। जिस वजह से उनको नुकसान भी नहीं होगा। कंपनी ने मार्च में एक करार के बाद कोरना से ठीक हुए लोगों के सैंपल लेने शुरू कर दिए थे। इस प्रोजेक्ट में सबसे पहले मरीजों का खून लिया गया। उसके बाद उसमें से एंटीबॉडी अलग की गई।
फिर उसी के आधार पर यह दवा बनाई गई। यह पहली ऐसी दवा है, जिसे कोरोना वायरस के खात्मे के लिए सिर्फ तीन महीने में बनाया गया है। कंपनी ने इंसानों पर अपनी दवा का परीक्षण शुरू कर दिया गया है। पहले चरण में वैज्ञानिक दवा से इंसानों की सुरक्षा और उसके सहन करने की क्षमता का पता लगाएंगे।
उन्होंने उम्मीद जताई है कि इस दवा से कोरोना वायरस के स्पाइक प्रोटीन संरचना को खत्म किया जा सकता है। अगर ट्रायल सफल रहा तो, जल्द ही बाजार में दवा उपलब्ध करवा दी जाएंगी। अमेरिकी दवा कंपनी एलि लिली ने बताया कि ट्रायल का परिणाम जून के आखिर में आने की संभावना है।
अंतर्राष्ट्रीय वैक्सीन गठबंधन को भारत ने दिए 15 मिलियन डॉलर
उधर, ब्रिटेन द्वारा गुरुवार को आयोजित कोरोना वैक्सीन शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की ओर से अंतर्राष्ट्रीय वैक्सीन गठबंधन को 15 मिलियन अमेरिकी डॉलर की मदद की घोषणा की।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग द्वारा आयोजित शिखर सम्मेलन में ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने दुनियाभर के राष्ट्रों से आग्रह किया कि वह लाखों लोगों को बचाने और भविष्य में संक्रामक रोगों से दुनिया की रक्षा के लिए टीकाकरण के लिए वित्त पोषण करने का संकल्प लें। मोदी, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सहित 35 देशों के प्रमुख और सरकारी प्रतिभागी इस सम्मेलन में शामिल हुए।