कोरोनावायरस पर बढ़ते कहर के बीच संयुक्त राज्य अमेरिका ने दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के नेताओं (आसियान) के विशेष शिखर सम्मेलन को स्थगित कर दिया है। वॉयस ऑफ अमेरिका के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय नोवेल कोरोनवायरस को हराने के लिए एकसाथ मिलकर काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने आसियान सहयोगियों के साथ मिलकर आसियान नेताओं की बैठक जो मध्य मार्च में निर्धारित थी उसे स्थगित करने का कठिन निर्णय लिया है।
आर्थिक-सामाजिक विकास के साथ सांस्कृतिक संबंधों में मजबूती के लिए आठ अगस्त 1967 को दक्षिण-पूर्व एशिया के पांच देशों इंडोनेशिया, मलयेशिया, फिलिपींस, सिंगापुर और थाईलैंड ने मिलकर एसोसिएशन ऑफ साउथ ईस्ट एशियन नेशंस (आसियान) की स्थापना की गई थी। पिछले 50 सालों के दौरान न सिर्फ यह संगठन आकार में बड़ा हुआ है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भी इसका असर भी बढ़ा है। ब्रुनई, कंबोडिया, वियतनाम, म्यांमार और लाओस को मिलाकर इसके सदस्य देशों की संख्या 10 हो गई है।
आसियान प्लस
वर्ष 1977 के एशियाई आर्थिक संकट के दौरान थाईलैंड में हुई बैठक में इस संगठन में चीन, जापान और दक्षिण कोरिया को मिलाकर आसियान प्लस नामक मंच का गठन किया गया। बाद में ईस्ट एशिया समिट के बैनर तले भारत, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया को भी इसमें शामिल कर लिया गया। इस तरह आसियान प्लस नामक मंच अस्तित्व में आया। वर्ष 2011 में छठे ईस्ट एशिया समिट में आसियान को और विस्तार देते हुए इसमें अमेरिका और रूस को भी शामिल कर लिया गया।
दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था
आसियान देशों का क्षेत्रफल 44 लाख वर्ग किलोमीटर है, जो धरती के क्षेत्रफल का तीन फीसदी है। इसके सदस्य देशों की कुल आबादी 64 करोड़ है जो दुनिया की कुल आबादी का 8.8 फीसदी है। वर्ष 2015 के आंकड़ों के अनुसार इन देशों की सम्मिलित जीडीपी 2.8 लाख करोड़ डॉलर है। इस लिहाज से यह अमेरिका, चीन, जापान, फ्रांस, और जर्मनी के बाद सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है।