नेपाल से कोरोना प्रभावित देशों की उड़ानों की आवाजाही रोकने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अनदेखी करते हुए नेपाल सरकार ने कहा है कि फिलहाल इसकी कोई जरूरत नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने 2 मार्च को ही अंतरिम आदेश दिया था कि सरकार कोरोनावायरस के खतरे को देखते हुए चीन, दक्षिण कोरिया, जापान, ईरान औप बहरीन और कोरोनावायरस की मार झेल रहे देशों से हवाई यातायात बंद कर दे। लेकिन नेपाल सरकार ने उस आदेश के जवाब में कहा है कि किसी भी देश की उड़ान को बंद नहीं किया जाएगा क्योंकि सरकार विश्व स्वास्थ्य संगठन के निर्देशों के आधार पर हर तरह के एहतियात बरत रही है।
नेपाल की सरकार ने कोर्ट से कहा है कि वह सभी क्षेत्रों में हर तरह के जरूरी कदम उठा रही है और एहतियात के सारे कदम उठाए जा रहे हैं, ऐसे में विमान सेवाएं रोकने की फिलहाल ज़रूरत नहीं है। दूसरी तरफ नेपाल के नागरिक विमानन प्राधिकरण ने सरकार से कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के दिशा निर्देशों का सख्ती से पालन किया जाए।
नेपाल के अखबार द हिमालयन टाइम्स के मुताबिक नेपाल के पर्यटन मंत्री योगेश भट्टाराई ने कहा है कि फिलहाल देश में ऐसी कोई इमरजेंसी नहीं है कि उड़ान सेवाओं को रोका जाए। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश से पहले ही सरकार ने वायरस को फैलने से रोकने के लिए तमाम कदम उठाए लिए थे। विदेश मंत्रालय ने त्रिभुवन इंटरनेशनल एयरपोर्ट समेत सभी घरेलू हवाई अड्डों को एडवाइजरी जारी की थी और सभी यात्रियों की पुख्ता मेडिकल जांच करने के निर्देश दे दिए गए थे।
पर्यटन मंत्री ने कहा कि हर देश की अपनी अपनी प्राथमिकताएं होती हैं और वह अपने देश के हालात को बेहतर तरीके से समझ सकता है। इसलिए दूसरे देशों से प्रभावित होकर कोई फैसला लेना सही नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार ने पहले ही ये निर्देश दे रखे हैं कि वायरस प्रभावित किसी देश से किसी और देश के रास्ते नेपाल आने वालों पर प्रतिबंध लगा रखा है, साथ ही ऑन अराइवल वीसा पर भी सरकार ने रोक लगा रखी है। उन्होंने दावा किया कि अगर जरूरत पड़ी तो सरकार विमान सेवाएं रोकने को लेकर भी कभी भी कोई फैसला ले सकती है।
उधर भूटान में कोरोनावायरस का एक मामला सामने आने के बाद सभी विदेश पर्यटकों के भूटान आने पर रोक लगा दी है। भूटान की भी अर्थव्यवस्था पर्टयकों से आने वाली विदेशी मुद्रा पर ही टिकी है। लेकिन फिलहाल भूटान ने दो हफ्ते के लिए यह कदम उठाया है।