फरवरी के अंत तक विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा दुनिया भर में वितरित किए गए टेस्ट किट में से कम से कम 1.4 मिलियन का उत्पादन बर्लिन में स्थित एक जर्मन कंपनी द्वारा किया गया था। चूंकि जर्मनी ने महामारी के बढ़ते स्तर को देखते हुए परीक्षणों की संख्या बढ़ा दी थी इसलिए उसने शुरुआती मामलों का पता लगा लिया।
जर्मनी और इटली की जनसंख्या लगभग बराबर है लेकिन दोनों देशों में संक्रमण की चपेट में आने वाले लोगों की उम्र में अंतर है। जर्मनी में जहां सबसे ज्यादा संक्रमितों की उम्र 46 है वहीं इटली में 63 साल है। इसके अलावा जर्मनी में इंटेसिव केयर बेड की संख्या बहुत ज्यादा है।
2012 की एक रिपोर्ट के अनुसार जर्मनी मे प्रति एक लाख व्यक्तियों की तुलना में 29.2 क्रिटिकल केयर बेड हैं। यह संख्या इटली की तुलना में दोगुनी है जहां प्रति एक लाख व्यक्तियों की तुलना में 12.5 क्रिटिकल केयर बेड हैं। वहीं अमेरिका में यह संख्या 34.2 है। जर्मनी में अभी केवल 70-80 प्रतिशत बेड पर मरीज हैं।
भारत की स्थिति
भारत में अभी केवल केरल ऐसा राज्य है जहां सबसे ज्यादा टेस्ट हुए हैं। जबकि अधिक आबादी वाले राज्यों उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, झारखंड, मध्यप्रदेश और ओडिशा में बहुत कम लोगों का टेस्ट किया गया है। अभी हम बेशक दूसरे चरण में हैं लेकिन लोग अब भी सरकार के आदेशों का पालन नहीं कर रहे हैं। धार्मिक आयोजनों में हिस्सा ले रहे हैं। बेवजह घर से बाहर घूम रहे हैं। इतना है नहीं बिमारी के लक्षण दिखाई देने पर नजरअंदाज करते हुए लोगों से मिलकर उनकी जिंदगी को खतरे में डाल रहे हैं। इसके अलावा कुछ लोग संदिग्ध वायरस का मरीज बताए जाने पर अस्पताल से भाग रहे हैं। यदि लोग थोड़ी से जागरुक हो जाएं तो वायरस का प्रसार रुक जाएगा और स्थिति को नियंत्रित किया जा सकेगा।