फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

COVID-19: जर्मनी में कोरोना संक्रमण की मृत्यु दर इस वजह से कम, भारत को सीखने की जरूरत

विज्ञापन
जर्मनी - फोटो : ट्विटर
विज्ञापन

दुनिया भर में कोरोना वायरस (COVID-19) से मरने वालों की संख्या 37 हजार से भी ज्यादा हो चुकी है। अभी दुनिया भर में कुल संक्रमित लोग 7,84,314 हैं। भारत में ये संख्या 1200 के पास पहुंच चुकी है। भारत में कोरोना वायरस से अब तक 32 लोगों की मौत हो चुकी है। कोरोना वायरस संक्रमण को लेकर लगातार शोध हो रहे हैं। ताकि इस वायरस के बारे में अधिक से अधिक जानकारी हासिल करके इसकी वैक्सीन तैयार की जा सके। अमरीका में कोरोना वायरस से संक्रमण का मामला चीन से करीब दोगुना हो गया है। जर्मनी की स्थिति भी कुछ ऐसी ही है लेकिन जर्मनी के आंकड़ों को देखें तो यहां मृत्यु दर बहुत कम है। क्या आप जानते हैं यहां मृत्यु दर कम होने के पीछे क्या कारण है? क्या भारत को इससे सीखने की जरूरत है?

विज्ञापन

जर्मनी - फोटो : ट्विटर
  • जर्मनी के मामले में मृत्यु दर महज 0.9% है। जो कि दुनिया के सभी देशों में सबसे कम है। इटली से में जहां मृत्यु दर 11.0% वहीं अमेरिका जैसे देश में इसकी दर 1.8 प्रतिशत है। विशेषज्ञों के अनुसार जर्मनी में मृत्यु दर उसके व्यापक परीक्षण के कारण इतनी कम है। दूसरे देशों में जहां केवल उन लोगों का टेस्ट किया जा रहा है जिनमें कोरोना के लक्षण हैं वहीं जर्मनी में इसके लिए व्यापक तरीका अपनाया जा रहा है।
  • इसका मतलब यह है कि जर्मनी वर्तमान में दुनिया में पांचवें सबसे अधिक संक्रमण वाला देश है। हालांकि सभी देशों की मृत्यु दर भिन्न हो सकती है, जोकि पूरी तरह टेस्टिंग पर आधारित है। टेस्टिंग आपके रोग की पहचान और उसका इलाज पर निर्भर करती है।

मास्क लगाए लोग - फोटो : pti
  • जर्मनी में 60 वर्ष से ऊपर के वयस्कों की आबादी का प्रतिशत कम है। जर्मनी में Covid-19 से संक्रमित मरीजों की मध्यमान आयु 47 है। इसका मतलब ये है कि जर्मनी ने अपने बुजुर्ग लोगों को संक्रमित नहीं होने दिया जितना कि कुछ अन्य देशों में हुआ। जर्मनी ने बुजुर्गों के बाहर निकलने पर पूरा प्रतिबंध लगा दिया गया। यही वजह है कि जर्मनी में मृत्यु दर कम है। भारत को इससे सीखने की जरूरत है।
  • जर्मनी में 28 जनवरी को जैसे ही एक व्यक्ति कोरोना से पॉजिटिव मिला। उसके संपर्क में आए सभी लोगों क्वारंटाइन कर दिया गया। सभी यात्राएं रद्द कर दी गईं। भारत में ये कदम काफी बाद में उठाया गया।
 
विज्ञापन

जर्मनी में भी कोरोना वायरस का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। - फोटो : PTI
  • मृत्यु दर उम्र और सामान्य स्वास्थ्य जैसे कारकों पर भी निर्भर करती है। कोरोना वायरस संक्रमण की सूरत में किसका टेस्ट होना है और किसका नहीं, इसे लेकर सभी देशों के अपने अलग-अलग मानदंड है। भारत में केवल उन्ही लोगों का टेस्ट किया जा रहा है जिन्होंने दूसरे देशों की यात्राएं की हैं लेकिन जर्मनी के मामले में ऐसा नहीं है।

  • जर्मनी के पास अपना विकेंद्रीकृत मेडिकल सिस्टम है जो कि अन्य यूरोपीय देशों, इतना ही नहीं अमेरिका या भारत में भी नहीं है। वहां सरकार जर्मनी के सभी 16 संघीय राज्यों में टेस्टिंग प्रक्रिया को नियंत्रित नहीं करती।

  • इंपीरियल कॉलेज लंदन के हालिया अध्ययन के मुताबिक जिनकी उम्र 80 वर्ष से अधिक है उनमें मृत्यु दर की आशंका 10 गुना बढ़ जाती है जबकि 40 से कम उम्र वालों में बहुत कम। ये एक तरह से आपकी इम्यून सिस्टम पर भी निर्भर करता है। इस मामले में जर्मनी ने समझदारी दिखाते हुए सभी उम्रदाराज लोगों से युवा का संपर्क लगभग न के बराबर कर दिया।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें