दुनिया में कोरोना वायरस से सबसे ज्यादा प्रभावित देशों की सूची में अमेरिका पहले नंबर है। यहां का न्यूयॉर्क शहर महामारी का केंद्र बना हुआ है। वहीं, न्यूयॉर्क में कोरोना वायरस से ठीक हो रहे 4300 मरीजों को पहले से ही वायरस के लिए असुरक्षित माने जा रहे नर्सिंग होम्स में भेजने का फैसला लिया गया। इससे पहले भी यह निर्णय लिया गया था, लेकिन आलोचना के बाद सरकार ने इसे वापस ले लिया था।
नर्सिंग होम के अधिकारी और नागरिकों द्वारा लगातार कहा जा रहा है कि ऐसा करने से स्वास्थ्य सुविधाओं पर दबाव पड़ सकता है। यहां तक कि गर्वनर एंड्रयू कूमो ने भी इस फैसले को लेकर आपत्ति जताई है। गवर्नर ने कहा है कि यह निर्णय वायरस को फैलने में मदद करेगा।
डेनियल अर्बेनी नामक एक व्यक्ति ने कहा कि यह सबसे बड़ा बेवकूफी भरा निर्णय है, अगर कोई लोगों को मारना चाहता है तो ही वह ऐसे निर्णय लेगा। डेनियल हाल ही में, इस फैसले को देखते हुए अपने 88 वर्षीय पिता को ब्रूकलिन नर्सिंग होम से घर ले आए। हालांकि, बाद में उनके पिता की कोविड-19 से मौत हो गई।
उन्होंने कहा कि यह कोई रॉकेट साइंस नहीं है। हम जानते हैं कि वायरस की चपेट में आने की संभावना वाले ज्यादातर व्यक्ति नर्सिंग होम्स और पुनर्वास केंद्र में हैं। यहां अधिकतर बुजर्ग व्यक्ति है, जिनका कोरोना से संक्रमित होने का खतरा अधिक है।
वहीं, स्वास्थ्य विभाग ने गुरुवार को कहा कि वह इस आंकड़ें पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता है। उसका कहना है कि वह अभी नर्सिंग होम्स में भर्ती हुए लोगों को लेकर सर्वेक्षण कर रहा है।
बता दें कि, दुनिया वैश्विक महामारी कोरोना के कहर से लगातार जूझ रही है। दुनिया में कोरोना वायरस संक्रमण के मामले गुरुवार तक 51 लाख से अधिक हो गए, जबकि मरने वालों की तादाद 3,29,768 हो चुकी है। इस बीच अमेरिका और यूरोप में कई जगह अर्थव्यवस्था खोलने के बावजूद स्थिति गंभीर बनी हुई है।
जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका में बीते 24 घंटे में 1255 लोगों की कोरोना वायरस की वजह से मौत हो गई है। देश में अब तक 96 हजार से ज्यादा लोगों ने इस वायरस से अपनी जान गंवाई है। इतनी बड़ी संख्या में मौत को देखते हुए अमेरिका में कोरोना मृतकों के लिए तीन दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की गई है।