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कोरोनावायरस का कहर: चीन के ‘सरकारी तंत्र’ की अनदेखी ने फैलाई महामारी, अब तक 811 की मौत

Sun, 09 Feb 2020 08:17 AM IST
योगेश साहू न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग।

सार

  • प्रशासन ने छिपाई जनता से जानकारी, समय रहते जनता को नहीं किया जागरूक
  • कम्युनिस्ट पार्टी काडर के दबाव में रहते हैं नौकरशाह
  • जानकार बोले, चीन के नक्शेकदम पर चलने वाले देश लें सबक
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corona - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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चीन में बेकाबू हो चुके कोरोनावायरस ने वहां बड़े पैमाने पर बरती गई राजनीतिक-प्रशासनिक लापरवाही को दुनिया के समक्ष उजागर कर दिया है। चीन पर नजर रखने वाले विश्लेषकों का कहना है कि जब वुहान में कोरोनावायरस फैल रहा था, तब वहां की मेयर ने सरकार पर आरोप लगाया तो रोग नियंत्रक अधिकारियों ने नौकरशाहों पर जिम्मेदारी डाल दी। सरकार में बैठे नेताओं ने तो जनता को ही इसके लिए जिम्मेदार ठहरा दिया।

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ताजा आंकड़ों के मुताबिक इस जानलेवा वायरस के कारण अब तक 811 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं 37000 से ज्यादा लोग इस वायरस से संक्रमित हैं। ऐसे में उच्च स्तर पर इस तरह आरोप-प्रत्यारोप वाकई हैरान करने वाले हैं। जानकारों का कहना है कि कोरोना को रोकने में विफल रहे चीन में पहली दफा जनता की नजरों में उनके सरकारी तंत्र की पोल खुल गई है, जिसे बड़े स्तर पर सफलतापूर्वक कार्य करने में दक्ष माना जाता था। चीन के राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अपने कार्यकाल में नौकरशाहों और टेक्नोक्रेट्स से ज्यादा पार्टी काडर को तवज्जो दी है।

इसके चलते पार्टी काडर नौकरशाही पर हावी हो गया है। नौकरशाह ऐसा कोई भी निर्णय लेने से कतराते हैं, जिससे सरकार की आलोचना हो।  मशहूर चीनी लेखक और वहां की राजनीति-नौकरशाही पर नजर रखने वाले शु काइझेन का मानना है कि कोरोना वायरस के बेकाबू होने में मौजूदा प्रशासनिक हालात का बड़ा योगदान है। वुहान से  फैली महामारी ने स्थानीय सरकार की कमजोर कार्रवाई और नौकरशाहों के मन में शीर्ष स्तर पर बैठे नेताओं के भय को उजागर कर दिया है। 
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कम्युनिस्ट पार्टी नेतृत्व को था महामारी का भान
सूत्रों का कहना है कि पिछले सप्ताह एक बैठक में कम्युनिस्ट पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने स्वीकारा था कि कोरोना वायरस चीन के लिए कड़ी परीक्षा साबित होगा। लेकिन इसके बावजूद हालात विकट ही नजर आए। अधिकारी वुहान समेत कई शहरों में अहम जानकारियां छिपाते रहे या भ्रामक जानकारी देते रहे। 

चीन के नक्शे कदम पर चलने वाले देश लें सबक
विश्लेषकों का कहना है कि पिछले कुछ दशकों में चीन में विकास की तेज रफ्तार ने सभी को आकर्षित किया है। कई देशों से हजारों नेताओं-नौकरशाहों ने वहां के राजनीतिक-प्रशासनिक तंत्र को समझने के लिए दौरे किए हैं। लेकिन चीन की मौजूदा परिस्थिति इन देशों के लिए भी सबक है।

शी जिनपिंग को कोस रहे लोग
चीन में राष्ट्रपति शी जिनपिंग पर शायद ही कोई सवाल करने की हिम्मत करता है। लेकिन मौजूदा परिदृश्य में शी की सार्वजनिक रूप से अनुपस्थिति पर लोग सवाल उठा रहे हैं। वे उनकी तस्वीर पोस्ट कर पूछे रहे हैं कि शी कहां हैं? खासतौर पर डॉक्टर ली वेनलियांग की मौत के बाद तो जनता में रोष चरम पर है।

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वुहान के मेयर ने माना, ऊपर से नहीं थी इजाजत

वुहान के मेयर हू शिआनवांग ने कबूल भी कर लिया कि उन्होंने कोरोना वायरस के महामारी बनने की बात इसलिए उजागर नहीं कि क्योंकि उन्हें शीर्ष स्तर से इसकी इजाजत नहीं थी। हालांकि अपना बचाव करते हुए हू ने कहा कि मैंने लोगों को मास्क पहनने, लगातार हाथ साफ रखने, समूहों में एकत्र न होने जैसी जानकारियां दी थीं।

जनता को ही ठहराया जिम्मेदार
राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग ने जब महामारी पर आपात स्थिति की घोषणा की, तब भी 19 जनवरी तक कोई नोटिस जारी नहीं किया गया। बीमारी नियंत्रण में होने का दावा करने वाले सरकारी स्वास्थ्य सलाहकार वांग गुआंग्फा ने एक साक्षात्कार में कहा कि उनके पास तब ज्यादा जानकारी नहीं थी। उन्होंने तो अपनी बात का उलटा अर्थ निकालने के लिए जनता को ही जिम्मेदार ठहरा दिया।

शी की चापलूसी में व्यस्त नेता
कम्युनिस्ट पार्टी के सचिव मा गुओकियांग ने सरकारी टेलीविजन को दिए साक्षात्कार में बीमारी को लेकर कहा कि स्थानीय लोगों में थोड़ी बेचैनी है। लेकिन साथ ही कहा कि वैसे लोगों को सबसे ज्यादा सुकून शी जिनपिंग को सुनकर ही मिलता है।
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