फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सेवा की मिसाल: ...और वे कभी लौटकर नहीं आ सकीं, मरीजों की सेवा में ही गंवा दी जान

Fri, 17 Apr 2020 05:29 AM IST
योगेश साहू न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस, वाशिंगटन।

सार

  • भारतीय मूल की अमेरिकी चिकित्साकर्मी
  • नहीं निभा सकीं परिवार से किया वादा
विज्ञापन
भारतीय मूल की अमेरिकी चिकित्साकर्मी माधवी अया अपनी बेटी और पति के साथ।
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

‘आपकी बहुत याद आती है मम्मी! आप प्लीज हार मत मानना। मैं आपको वापस घर देखना चाहती हूं।’ उधर से अगले दिन जवाब आया...‘लव यू बेटा! वापस आऊंगी’, लेकिन वह लौटकर नहीं आईं। ये वो आखिरी बातचीत थी, जो संक्रमण से जूझ रही फिजिशियन सहायक माधवी अया और उनकी बेटी मिनोली के बीच हुई थी।

विज्ञापन


कोरोना संक्रमितों से पटे पड़े अमेरिका के ब्रुकलीन अस्पताल की इमरजेंसी में दिन-रात काम कर रहीं भारतीय मूल की माधवी पिछले माह खुद संक्रमित हो गईं। 1994 में अमेरिका में बसने से पहले उन्होंने भारत में भी सेवाएं दी थीं। फिर वहां जाकर फिजिशियन सहायक के रूप में काम शुरू किया। ब्रुकलिन के जिस सरकारी अस्पताल में वह संक्रमित हुईं, वहां 12 साल तक काम किया।

चिकित्साकर्मियों के अभाव से जूझ रहे अस्पताल की इमरजेंसी में 61 वर्षीय माधवी कई जिम्मेदारियां एक साथ निभा रही थीं। मरीज की मेडिकल हिस्ट्री जांचने से लेकर, लक्षणों का पता लगाने के दौरान उन्हें कोरोना ने घेर लिया। मरीजों को धैर्य बंधाने वाली माधवी जब खुद बेड पर पहुंचीं तो आखिरी पलों में उन्हें सांत्वना देने वाल कोई नहीं था।
विज्ञापन


आप घर चले जाओ.. मिलने मत आना, रिपोर्ट पॉजिटिव निकली है...
माधवी के पति राज अया जांच के लिए मेडिकल सेंटर ले गए। माधवी अंदर चली गईं वे खुद कार में बैठे रहे। राज ने लिखा, ‘एसएच (स्वीटहार्ट) एक्स-रे हो गया।’ माधवी ने जवाब दिया, ‘आप घर चले जाओ। थोड़े समय में कॉल कर लूंगी।’ लेकिन माधवी को भर्ती कर लिया गया था। माधवी ने मैसेज किया, ‘मेरी रिपोर्ट पॉजिटिव निकली है।’ राज यह सुनकर टूट गए। माधवी ने कहा, ‘घबराओ नहीं। आप मां का खयाल रखना और मिनोली को कॉलेज से ले आना।’

बेटी ने सोचा मां को निमोनिया हुआ है...
अगले दिन मिनोली यह सोचते हुए घर लौटी थी कि मां को निमोनिया हुआ है और जब वह ठीक होकर आएंगी तो, उन्हें सरप्राइज दूंगी। ‘जब घर पहुंचने पर पता लगा कि निमोनिया नहीं, वायरस का संक्रमण हुआ है, तो मैं वहीं जमीन पर गिर गई।

घर के पास भर्ती थीं लेकिन कोई मिल न सका

जिस अस्पताल में उन्हें भर्ती कराया गया, वह घर से महज तीन किमी. की दूरी पर ही था, लेकिन आखिरी पलों में एकदम अकेली रहीं। बेटी और पति उन्हें आखिरी बार देख तक नहीं पाए। इसका पूरे परिवार को अफसोस है।

बेटी से कहे वो आखिरी शब्द..
माधवी की मौत से तीन दिन पहले ही मिनोली ने उन्हें बताया था, ‘मम्मी इन दिनों कॉलेज बहुत तनावपूर्ण हो रहा है। लेकिन अच्छी बात यह है कि मैं घर आ गई हूं। माधवी ने जवाब दिया, ‘बेटा, ध्यान केंद्रित करो।’ बेटी ने कहा, ‘वही कर रही हूं मम्मी, लेकिन आप जल्दी आ जाओ। मैं तहेदिल से आपको बहुत प्यार करती हूं मम्मी।

मां ने लिखा, ‘लव यू बेटा’...

बस, यही वो आखिरी शब्द थे जो माधवी ने कहे थे। चंद घंटों बाद वे परिवार से बहुत दूर चली गईं।

वह हमारे लिए खड़ी रहीं, लेकिन हम नहीं...
वह हमेशा हमारे लिए खड़ी रहीं। लेकिन जब खुद बीमार पड़ीं तो हममें से कोई उनके पास नहीं खड़ा था।’ यह कहते-कहते माधवी के पति की आंखें भर आईं। उनके सहकर्मियों का कहना है, ‘माधवी का जाना हमारे लिए एक बड़ा झटका है।

मां से सुनना चाहती थी, सब ठीक हो जाएगा...
मिनोली कहती हैं, मुझे अब भी भरोसा नहीं हो रहा कि मेरी मां नहीं रहीं। मिनोली वैसे तो खुद डॉक्टर बनना चाहती हैं, लेकिन आज वह उस स्वास्थ्य तंत्र पर बेहद नाराज हैं, जो अपने चिकित्साकर्मियों को ही नहीं बचा सकता। अपनी मां के घर न लौट पाने का गम मिनोली को बहुत परेशान किए हुए है। वह कहती है, ‘मैं एक बार मेरी मां को गले लगकर उनसे सुनना चाहती थी कि सब ठीक हो जाएगा।’
विज्ञापन

शुरुआत में सरकारी ढिलाई से हुईं संक्रमित

एक सहकर्मी ने बताया कि मरीजों का ध्यान रखने के दौरान माधवी जब संक्रमित हुईं, तब तक कर्मियों को सुरक्षा उपकरण पहनने के निर्देश नहीं मिले थे। जब सक्रमितों की बाढ़ आने लगी और बिना लक्षण वाले लोग भी पॉजिटिव पाए जाने लगे, तब अस्पतालों को लगा कि बड़ी तादाद में मरीजों से घिरने पर स्टाफ भी संक्रमित हो सकता है।

परिवार पर दोहरी मार...
राज को मिनोली की यह हालत देखकर चिंता सताने लगी है। उन्होंने इस बारे में डॉक्टरों से भी परामर्श लिया है। लेकिन अब परिवार के सामने आर्थिक तंगी भी बड़ी दिक्कत है क्योंकि घर माधवी की कमाई से ही चल रहा था।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें