देश के स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता सोन यंग-रे ने सफाई दी है कि किसी भी मरीज को तभी पूरी तरह से ठीक करार दिया जा रहा है, जब 24 घंटे के अंतर पर उसकी दो जांच रिपोर्ट निगेटिव आई हो। यह जांच पॉलीमिरेज चेन रिएक्शन (पीसीआर) प्रकिया से की गई थी।
इसके बावजूद पुराने मामलों में फिर से संक्रमण मिलना संकेत है कि वायरस शरीर में ज्यादा समय तक टिक सकता है। कोरिया विश्वविद्यालय गुरो अस्पताल के संक्रमण रोग विज्ञानी प्रो. वू जो चेताते हैं कि 91 का आंकड़ा शुरुआत भर है, यह और बढ़ेगा।
डब्ल्यूएचओ ने कहा कि वह ठीक होने के कुछ समय बाद रोगियों में फिर वायरस मिलने का अध्ययन करवा रहा है। संगठन के मुताबिक, यह नया रुझान है, इसे लेकर ज्यादा डाटा की जरूरत है। संगठन ने जांच के दौरान सैंपल लेने की प्रक्रिया में सावधानी बरतने की बात कही।
हॉन्गकॉन्ग में हुए एक शोध के मुताबिक, संक्रमित मरीज पहले हफ्ते के दौरान दूसरे लोगों को ज्यादा चपेट में ले सकता है। अध्ययन में पता लगाया गया कि यह संक्रमण इतनी तेजी से क्यों फैल रहा है। शोध में 33 से 75 साल के 23 संक्रमितों की लार के सैंपल लिए गए। जांच में पाया गया, मरीजों में संक्रमण के पहले सात दिनाें ‘वायरल लोड’ काफी ज्यादा था, जो धीरे-धीरे कम हो गया।
शोधकर्ताओं ने कहा, पहले हफ्ते मरीज को अस्पताल में भर्ती कराने से पहले संक्रमण दूसरे व्यक्तियों में आसानी से फैल सकता है। हॉन्गकॉन्ग यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफेसर केल्विन तो काई-वांग का कहना है कि कोरोना संक्रमण मरीज में एक माह तक रह सकता है।