अमेरिका और तालिबान के बीच हुए शांति समझोते के बाद भी इलाके में शांति बहाली न होने से अफगानिस्तान का अंदरूनी संकट लगातार बढ़ता जा रहा है। ऐसे समय में जब कोरोना के खतरे और प्रकोप से अफगानिस्तान लगातार जूझ रहा है, अमेरिका ने अफगान सरकार को दी जा रही मदद में 100 करोड़ डॉलर की तत्काल कटौती कर दी है।
अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने काबुल में अफगानी राष्ट्रपति और विदेश मंत्री से मिलकर ये एलान किया कि अब तक शांति बहाली में नाकामी को देखते हुए अमेरिका यह कदम उठा रहा है और 2021 में भी अफगानिस्तान को दी जा रही मदद में 100 करोड़ डॉलर की और कटौती भी की जाएगी।
हालांकि राष्ट्रपति अशरफ गनी ने एक बयान जारी करके कहा है कि अमेरिकी मदद में कटौती किए जाने से अफगानिस्तान के प्रमुख क्षेत्रों पर सीधा फर्क नहीं पड़ेगा। उन्होंने इन क्षेत्रों से जुड़े लोगों को भरोसा दिलाया कि वह इस कमी को पूरा करने की कोशिश करेंगे और इसके लिए दूसरे वैकल्पिक रास्ते तलाशेंगे।
उन्होंने कहा कि उनके लिए देश को बचाना, महंगाई पर काबू पाना और नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराना पहली प्राथमिकता है और इसके लिए अमेरिकी मदद कम किए जाने से कोई फर्क नहीं पड़ता। गनी ने ये भी कहा कि अमेरिका ने मदद में कटौती करने की जो शर्तें रखी हैं उन्हें पूरा करने की हम पूरी कोशिश करेंगे और उन्हें भरोसा में लेने की कोशिश भी करेंगे।
उन्होंने कहा कि अमेरिकी विदेश मंत्री के साथ उनकी बातचीत इलाके में शांति बहाली और सैन्य ताकतों में कटौती पर केंद्रित थी और यह बातचीत बेहद सकारात्मक और रचनात्मक रही है। गनी ने तालिबानी नेताओं से अपील की है कि वह शांति समझौते का पालन करें।
उन्होंने कोरोना वायरस के भयानक संकट को देखते हुए तालिबानी धर्मगुरुओं की ओर से जारी शांति बहाली और युद्धबंदी की अपील का समर्थन किया और लोगों की जानमाल की हिफाजत को सबकी जिम्मेदारी बताया। लेकिन गनी ने ये भी कहा कि अगर कोरोना वायरस से कोई बड़ी त्रासदी हुई, तो उसके लिए तालिबान और उसके विदेशी समर्थक ही जिम्मेदार होंगे।