दुनिया में इस समय वैक्सीन डोज की बेहद कमी है। जो डोज फाइजर-बायोएनटेक, मॉडर्ना, जॉनसन एंड जॉनसन और एस्ट्राजेनेका कंपनियों ने बनाए हैं, उनके ज्यादातर हिस्से पर धनी देशों ने कब्जा कर लिया है। इसलिए ज्यादातर विकासशील देशों को चीन और रूस के वैक्सीन पर निर्भर करना पड़ रहा है।
चीन के वैक्सीन को जल्द मंजूरी
ऐसी खबर है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन जल्द ही चीन में बने वैक्सीन को अपनी मंजूरी देने वाला है। एस्ट्राजेनेका, जॉनसन एंड जॉनसन और दोनों चीनी कंपनियों के वैक्सीन की खासियत यह है कि इन्हें सामान्य रेफ्रिजरेटर के तापमान पर रखा जा सकता है। इसलिए विकासशील देशों में इन्हें लाना-ले जाना आसान है। फाइजर और मॉडर्ना के वैक्सीन के साथ ये सुविधा नहीं है।
गरीब देशों को चीन देगा एक करोड़ डोज
विकासशील और गरीब देशों को वैक्सीन सप्लाई करने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन की देखरेख में चलाए जा रहे कार्यक्रम कॉवैक्स को चीन ने एक करोड़ डोज देने का वादा किया है। इसके अलावा अलग-अलग देशों से द्विपक्षीय समझौतों के तहत वह उन्हें दस करोड़ डोज भेज चुका है। इनमें बड़ी संख्या में वैक्सीन डोज अनुदान के रूप में दिए गए हैं।
अमेरिकी थिंक टैंक काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशन्स में ग्लोबल हेल्थ प्रोग्राम के निदेशक थॉमस बोलिकी ने अमेरिकी टीवी चैनल सीएनएन को बताया कि इस समय पहली प्राथमिकता नए संक्रमणों को रोकना और लोगों को मरने से बचाना है। ऐसे में चीन का वैक्सीन अनुदान देना खुशी की बात है, लेकिन वह ऐसा अपने रणनीतिक हितों के मुताबिक कर रहा है। उसने लगभग 65 देशों को वैक्सीन देने का वादा किया है, जिनमें ज्यादातर वे देश हैं, जो चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव का हिस्सा हैं।
सभी कंपनियां स्थगित करें पेटेंट तो ही सभी को लग पाएंगे टीके
विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक सभी कंपनियां कोरोना वैक्सीन के अपने पेटेंट स्थगित नहीं करतीं, दुनिया की लगभग आठ अरब की पूरी आबादी का टीकाकरण संभव नहीं होगा। हालांकि पेटेंट हटने के बाद भी उत्पादन की समस्या बनी रहेगी। वैक्सीन उत्पादन की क्षमता सीमित देशों के पास ही है।
विशेषज्ञों ने अनुमान लगाया है कि अगले छह से 12 महीनों तक वैक्सीन सप्लाई में बाधा बनी रहेगी। टर्की के स्वास्थ्य मंत्री फहरतिन कोका ने पिछले हफ्ते कहा कि उनके देश के लिए अगले दो महीने तक वैक्सीन हासिल करना मुश्किल बना रहेगा। टर्की ने रूसी वैक्सीन स्पुतनिक-वी के पांच करोड़ डोज मंगवाने का करार किया है। इसके अलावा वह अपने देश के अंदर भी वैक्सीन तैयार करने की कोशिशों में जुटा हुआ है। क्यूबा में पांच वैक्सीन तैयार करने पर काम चल रहा है, जिनमें दो तीसरे चरण के परीक्षण में हैं।
लेकिन अभी कुल सूरत यह है कि वैक्सीन की सप्लाई छिटपुट बनी हुई है, जबकि कोरोना वायरस के नए रूप और संक्रमण की नई लहर ने दुनिया को फिर से ऐसा लगता है कि वहीं पहुंचा दिया है, जहां ये एक साल पहले थी। बल्कि स्थिति उससे भी काफी बुरी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने ध्यान दिलाया है कि पिछले हफ्ते दुनिया में नए संक्रमण के उतने मामले सामने आए, जितने महामारी आने के बाद पहले पांच महीनों में आए थे।