फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कोरोना: लक्षण दिखने के तीन दिन बाद करानी चाहिए जांच, जल्दबाजी में गलत आ सकते हैं नतीजे

Thu, 11 Jun 2020 12:47 PM IST
अंशुल तलमले वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
विज्ञापन
कोरोना जांच - फोटो : PTI
विज्ञापन

अगर कोई शख्स कोविड-19 से संक्रमित होता है और शुरुआती स्तर पर ही उसकी जांच की जाती है तो नतीजों में ऐसा हो सकता है कि वह संक्रमित न पाया जाए। जबकि असल में वह इस बीमारी की चपेट में आ चुका होता है। एक अध्ययन में यह दावा करते हुए कहा गया है कि इस विषाणु की जांच लक्षण दिखाई देने के तीन दिन बाद करना बेहतर होता है।

विज्ञापन


यह अध्ययन पत्रिका ‘एनल्ज ऑफ इंटरनल मेडिसिन’ में प्रकाशित हुआ है। अमेरिका के जॉन्स हॉपकिंस विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने अस्पताल में भर्ती मरीजों समेत कई अन्य मरीजों के मुंह के लार के 1,330 नमूनों का विश्लेषण किया।

अध्ययन की सह लेखक लॉरेन कुसिर्का ने कहा, ‘चाहे किसी व्यक्ति में लक्षण हों या न हों, लेकिन वह संक्रमित नहीं पाया जाता है तो यह इस बात की गारंटी नहीं है कि वह विषाणु से संक्रमित नहीं है। संक्रमित न पाए जाने पर हम मानते हैं कि यह जांच सही है और इससे दूसरे लोगों की जान जोखिम में पड़ जाती है।’
विज्ञापन


वैज्ञानिकों के अनुसार, जिन मरीजों के कोरोना वायरस की चपेट में आने की अधिक आशंका होती है उनका संक्रमित मानकर इलाज करना चाहिए खासतौर से अगर उनमें कोविड-19 के अनुरूप लक्षण हैं। उनका मानना है कि मरीजों को जांच की कमियों के बारे में भी बताना चाहिए।

आंकड़ों के आधार पर शोधकर्ताओं ने अनुमान लगाया कि संक्रमण की चपेट में आने के चार दिन बाद जिनकी जांच की जाती है उनमें 67 प्रतिशत से अधिक लोगों के संक्रमित न पाए जाने की संभावना होती है भले ही वे असल में संक्रमित होते हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि कोरोना वायरस संक्रमण की जांच कराने का सबसे सही समय संक्रमण के आठ दिन बाद है जो कि लक्षण दिखने के औसतन तीन दिन हो सकता है।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें