कोरोनाकाल ने दुनियाभर में लोगों की मानसिक परिस्थितियां पलट कर रख दी हैं। किसी की एकाग्रता खो गई है तो कोई उत्साह और लक्ष्यविहीन महसूस कर रहा है। काफी लोगों को जीवन ही निरर्थक लगने लगता है और वह स्वस्थ होने के बावजूद ऊर्जाहीन महसूस कर रहे हैं।
अमेरिका के मशहूर प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक एडम गांट ने मौजूदा दौर में पैदा हुए ठहराव और खालीपन को शिथिलता (लैंग्विसिंग) नाम दिया है। उनका कहना है लोग जैसे भी भावों से गुजर रहे हैं वह उन्हें पहचानें और उनके बारें बात करें वरना अवसाद समेत अन्य गंभीर मानसिक बीमरियों के शिकार हो सकते हैं।
कोरोना काल में डिप्रेशन और फ्लारिशिंग के बीच फंसे लोग
मनोवैज्ञानिक में मानसिक स्वास्थ्य को अवसाद (डिप्रेशन) से तंदुरुस्ती (फ्लरिशिंग) के बीच देखा जाता है। फ्लारिशिंग अच्छी मानसिक सेहत का शिखर है तो डिप्रेशन इसकी खाई। वहीं लैंग्विशिंग अवसाद और तंदुरुस्ती के बीच की स्थिति है। इस अवस्था में आप प्रेरित नहीं होते, एकाग्रता भंग हो जाती है और बीमारियों का जोखिम बढ़ जा है।
अवसाद नहीं फिर भी थमा जीवन
मानसिक सेहत लेकर लैंग्विशिंग शब्द का इस्तेमाल 20 साल पहले समाजविद कोरी केयौस ने किया था। उन्होंने अपने शोधों में पाया था कि काफी लोग अवसाद में होने के बावजूद जीवन में आने नहीं बढ़ पा रहे थे। इसे देखते हुए कोरी ने कहा यह शिथिल लोग अगले दशक में अवसाद के हो जाएंगे। इस बात के सबूत कोरोनाकाल में इटली में मिले हैं।
छोटे लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित करें
- शिथिलता तोड़ने के लिए छोटी-छोटी जीत हासिल करना शुरू करें।
- ऐसी चुनौतियां स्वीकारें, जिनसे आपका कौशल बढ़े और संकल्प शक्ति मजबूत हो।
- आपके लिए मायने रखने वाले कामकाज के लिए रोजाना समय निकालें भले ही यह दिलचस्प प्रोजेक्ट हो या कोई अन्य लक्ष्य।
- ऊर्जा व उत्साह जागृत करने के लिए एक छोटा कदम ही काफी होता है।