कोरोना को लेकर देश और दुनिया में लड़ाई जारी है। आज स्वतंत्रता दिवस के मौके पर भी जो रौनक हर साल देखी जाती है, वो इस साल कोविड-19 की वजह से नहीं थी। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में भी कोरोना को लेकर कई बार चर्चा की। वहीं कोरोना को लेकर रोजाना नए शोध और स्टडी सामने आ रही हैं।
जो लोग कोरोना से ठीक हो गए हैं, उनके मन में सबसे बड़ा सवाल यह रहता है कि क्या उन्हें दोबारा कोरोना हो सकता है या नहीं या फिर वो अब पूरी तरह से सुरक्षित हैं। हालांकि वैज्ञानिकों का मानना है कि एक बार जब किसी व्यक्ति को कोरोना हो जाता है तो उसके शरीर में एंटीबॉडी बनने लगती हैं, जिस कारण संक्रमित मरीज को कई महीनों तक दोबारा कोरोना होने की संभावना कम होती है।
हार्वर्ड विश्वविद्यालय के इम्यूनोलॉजिस्ट डॉ माइकल मीना का कहना है कि कोरोना संक्रमित व्यक्ति के शरीर में इम्यून मॉलिक्यूल बनने लगते हैं, जिन्हें एंटीबॉडी कहा जाता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि ये एंटीबॉडी किसी मरीज के शरीर में दो-तीन महीने तक रहती है।
हालांकि वैज्ञानिकों और जानकारों का मानना है कि कम समय में कोई एक व्यक्ति दोबारा कोरोना से संक्रमित हो जाए, ऐसी संभावना काफी कम है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा होता है कि दुनिया में ऐसे मामले क्यों सामने आए जहां कम समय में किसी संक्रमित व्यक्ति को दोबारा कोरोना हो गया हो।
इसके जवाब में वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर किसी संक्रमित व्यक्ति को दोबारा कोरोना हो जाए तो इसका मतलब यह है कि वो पहले पूरी तरह से ठीक नहीं हुआ होगा।