समूचे विश्व के लिए चिंता का सबब बने कोरोना वायरस की आखिर उत्पत्ति कैसे हुई? यह राज अब तक दुनिया के सामने नहीं आया है। यह चीन से फैला यह सभी मानते हैं, लेकिन यह पैदा कैसे हुआ, इसे लेकर अभी तक कोई ठोस पड़ताल नहीं हो सकी है। ऐसे में विश्व के 16 शीर्ष जीव वैज्ञानिकों ने नई व स्वतंत्र जांच का आह्वान किया है।
अंतरराष्ट्रीय जर्नल 'साइंस' में प्रकाशित एक पत्र में, स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के माइक्रोबॉयोलॉजिस्ट डेविड रिलमैन और यूनिवर्सिटी ऑफ वाशिंगटन के वॉयरोलॉजिस्ट जेसी ब्लूम समेत 16 अन्य प्रतिष्ठित जीव वैज्ञानिकों ने चीन की लैबोरेटरियों और एजेंसियों से आह्वान किया है कि वे एक स्वतंत्र जांच के लिए अपने रिकॉर्ड उजागर करें।
जीव वैज्ञानिकों ने कहा है कि वायरस के प्राकृतिक और प्रयोगशाला दोनों तरह से पैदा होने की आशंका की जांच होना चाहिए। इन आशंकाओं को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। जब तक कोई तीसरे तरह की आशंका पैदा न हो, तब तक इन्हीं पर फोकस कर पड़ताल की जाना चाहिए।
चमगादड़ से इंसान में फैला : चीन
कोरोना वायरस की उत्पत्ति के बारे में विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी डब्ल्यूएचओ और चीन द्वारा की गई साझा पड़ताल में दावा किया गया कि यह चमगादड़ से इंसान में पहुंचा। यह चमगादड़ से निकलकर किसी माध्यमिक जानवर के माध्यम से इंसान तक पहुंचा। यह किसी एक लैब में हुई दुर्घटना के कारण पैदा नहीं हुआ।
चीन व डब्ल्यूटीओ की साझा रिपोर्ट वैज्ञानिक नहीं
वहीं, वैज्ञानिकों के समूह ने कहा है कि चीन व डब्ल्यूटीओ की उक्त साझा जांच रिपोर्ट के निष्कर्ष वैज्ञानिक रूप से उचित नहीं थे। इसमें वायरस पहली बार मनुष्य में कैसे मिला, इसका कोई ब्यौरा नहीं दिया गया। प्रयोगशाला में दुर्घटना की आशंका को लेकर भी रिपोर्ट में केवल एक सरसरी तौर पर जानकारी दी गई है।
इसलिए होना चाहिए स्वतंत्र जांच
जीव वैज्ञानिकों ने मांग की है कि वायरस की उत्पत्ति की जांच स्वतंत्र, उद्देश्यपरक, डाटा आधारित और व्यापक विशेषज्ञता वाली होना चाहिए। चीन की सरकारी स्वास्थ्य एजेंसियों और अनुसंधान प्रयोगशालाओं को निष्पक्ष जांच के लिए अपना रिकॉर्ड जनता के सामने उजागर करने की जरूरत है।