इस महामारी से सहमे रूस में विजय दिवस का जश्न फीका रहा। द्वितीय विश्व युद्ध में नाजियों पर जीत का जश्न औपचारिकता ही रहा। ऐसा पहली बार हुआ है। रूस हर वर्ष इस मौके पर पूरे देश में जश्न मनाता रहा है।
रूस में विजय दिवस पर हर साल की तरह राष्ट्रीय अवकाश रहा और क्रेमलिन (रूसी संसद) के बाहर सैनिकों की कब्र पर फूल चढ़ाए गए। साथ ही जीत की इस 75वीं वर्षगांठ पर एक औपचारिक समारोह में युद्ध के दौरान सोवियत सेना के साहस और कुर्बानियों के सम्मान में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने एक छोटा भाषण भी दिया।
लेकिन पूूरा समारोह फीका रहा। यही नहीं लाल चौक (रेड स्क्वायर) पर होने वाली भव्य परेड व लोगों के जुलूस का आयोजन रद्द कर दिया गया। पुतिन ने कहा, यह समारोह मनाना काफी जोखिम भरा है।