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COP27: नए वैश्विक जलवायु वित्त लक्ष्य को प्राप्त करने पर भारत का जोर, कहा- विकसित देशों के नेतृत्व की जरूरत

Thu, 10 Nov 2022 11:22 PM IST
शिव शरण शुक्ला वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, शर्म-अल-शेख

सार

इससे पहले साल 2009 में कोपेनहेगन में हुए सीओपी-15 में विकसित देशों ने जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने में विकासशील देशों की मदद करने के लिए संयुक्त रूप से 2020 तक प्रति वर्ष 100 अरब डॉलर जुटाने की प्रतिबद्धता जताई थी। हालांकि विकसित देशों ने कभी भी पूरी तरह से ये मदद नहीं दी।
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जलवायु परिवर्तन (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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मिस्र के शर्म अल-शेख में आयोजित यूएन जलवायु कांफ्रेंस (कॉप-27) में भारत ने साल 2024 तक नए वैश्विक जलवायु वित्त लक्ष्य को प्राप्त करने पर जोर दिया है। भारत ने कहा कि विकासशील देशों को अपने महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को पूरा करने के लिए प्रति वर्ष 100 अरब डॉलर के स्तर से जलवायु वित्त लक्ष्य को प्राप्त करना चाहिए। इस दौरान भारत ने जलवायु वित्त के लिए संसाधनों तो एकत्रित करने के लिए विकसित देशों के नेतृत्व की जरूरत पर भी जोर दिया। बुधवार को COP27 में एनसीक्यूजी पर उच्च-स्तरीय मंत्रिस्तरीय वार्ता के दौरान भारत ने यह बातें कहीं। 

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इस दौरान भारत ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (एनडीसी) लक्ष्यों को पूरा करने के लिए विकसित देशों से आर्थिक-तकनीकी और क्षमता-निर्माण के क्षेत्र में सहयोग की आवश्यकता है। जलवायु परिवर्तन पर आईपीसीसी के कार्यों का हवाला देते हुए भारत ने कहा कि विकसित देश सबसे ज्यादा कार्बन उत्सर्जन करते हैं ऐसे में वे खुले आम संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन रूपरेखा सम्मेलन (यूएनएफसीसीसी) और इसके पेरिस समझौते के मूल सिद्धांतों के महत्व का भी उल्लंघन करते हैं।  

सीओपी-15 में तय हुआ था ये लक्ष्य
गौरतलब है कि इससे पहले साल 2009 में कोपेनहेगन में हुए सीओपी-15 में विकसित देशों ने जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने में विकासशील देशों की मदद करने के लिए संयुक्त रूप से 2020 तक प्रति वर्ष 100 अरब डॉलर जुटाने की प्रतिबद्धता जताई थी। हालांकि विकसित देशों ने कभी भी पूरी तरह से ये मदद नहीं दी। भारत सहित विकासशील देश, अमीर देशों को एक नए वैश्विक जलवायु वित्त लक्ष्य को लेकर सहमत होने के लिए प्रेरित कर रहे हैं जिसे एनसीक्यूजी के रूप में भी जाना जाता है। विकासशील देशों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के अनुकूल कदम के लिए लागत में बढ़ोतरी के मद्देनजर रकम बढ़नी चाहिए। 
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भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि विकसित देशों द्वारा 2009 में जताई गई 100 अरब डॉलर की प्रतिबद्धता न केवल जरूरतों के पैमाने पर दी गई थी, बल्कि अभी तक हासिल नहीं की गई है। ऐसे में ना केवल पहले से तय लक्ष्य को हासिल करने पर जोर दिया जाना चाहिए, बल्कि नए वैश्विक जलवायु वित्त लक्ष्य को भी तय करने की जरूरत है। 

तापमान को नियंत्रित रखने में  भारत कर सकता है मदद : यादव
इससे पहले मंगलवार को केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा है कि जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से लड़ने के लिए मैंग्रोव सबसे अच्छा विकल्प है। भारत को मैंग्रोव को उगाने और उनको बनाए रखने में महारत हासिल है। वह अपनी इस विशेषज्ञता को दूसरे देशों के साथ साझा कर तापमान को नियंत्रित रखने में उनकी मदद कर सकता है। मैंग्रोव समुद्र के तटीय इलाकों और दलदली जमीन पर उगने वाले पेड़-पौधों और वनस्पतियों को कहते हैं। केंद्रीय मंत्री ने कॉप27 से इतर ‘मैंग्रोव अलायंस फॉर क्लाइमेट’ के शुभारंभ के मौके पर यह बात कही। संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया ने दुनियाभर में मैंग्रोव पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण और बहाली को मजबूत करने के उद्देश्य से यह गठबंधन बनाया है। इसमें भारत के साथ ही ऑस्ट्रेलिया, जापान, स्पेन और श्रीलंका शामिल हुए। 

मिस्र के समुद्र तटीय शहर शर्म अल-शेख में जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए चर्चा के वास्ते दुनियाभर से प्रतिनिधि रविवार को एकत्र हुए। यह बैठक ऐसे समय हो रही है, जब दुनिया कई अन्य संकटों से जूझ रही है। इनमें यूक्रेन युद्ध, महंगाई, भोजन और उर्जा शामिल हैं। 

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