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अमेरिका में कोरोना वैक्सीनेशन पर उठे विवाद और सवाल, ट्रंप के दावे पर उठे सवाल

Sat, 02 Jan 2021 02:32 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन

सार

बाइडन ने वादा किया कि राष्ट्रपति बनने के बाद वे अपने कार्यकाल के पहले 100 दिनों में इस बात की गारंटी देंगे कि पांच करोड़ लोगों को दस करोड़ टीके लगाए जाएं...
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
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विस्तार
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अमेरिका में कोरोना टीकाकरण की धीमी और असमान प्रक्रिया को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। डोनाल्ड ट्रंप इसे लेकर निशाने पर है। ट्रंप प्रशासन ने वायदा किया था कि 2020 की समाप्ति तक दो करोड़ लोगों को टीका लगा दिया जाएगा। लेकिन 31 दिसंबर तक 28 लाख लोगों को ही टीका लगाया जा सका। एक जनवरी तक ये संख्या 35 लाख तक पहुंची थी। अमेरिका के सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंव प्रिवेंशन के मुताबिक बीते साल की समाप्ति तक राज्यों को एक करोड़ 24 लाख टीकों की आपूर्ति की गई। लेकिन टीका लगाने की रफ्तार उसकी तुलना में बहुत धीमी रही है।

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कई राज्यों ने इस बात पर एतराज जताया है कि टीका लगाने के खर्च का पूरा बोझ उनके माथे पर डाल दिया गया है। साथ ही टीका लगाने के लिए जरूरी तमाम स्टाफ और सामग्रियों को जुटाने की जिम्मेदारी भी उन पर ही डाल दी गई है। इन राज्यों ने संघीय सरकार से और संसाधनों की मांग की है। राष्ट्रपति ट्रंप ने पिछले बुधवार को एक ट्विट में कहा था- संघीय प्रशासन ने टीकों की आपूर्ति राज्यों को कर दी है। अब यह राज्यों पर है कि वे लोगों को टीका लगाएं।

निर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडन ने दो रोज पहले ट्रंप प्रशासन पर आरोप लगाया था कि टीकों की आपूर्ति की योजना भी लक्ष्य से पीछे चल रही है। बाइडन ने वायदा किया कि 20 जनवरी को राष्ट्रपति बनने के बाद वे सुनिश्चित करेंगे कि टीकाकरण का नेतृत्व संघीय प्रशासन अपने हाथ में ले। वे अपने कार्यकाल के पहले 100 दिनों में इस बात की गारंटी देंगे कि पांच करोड़ लोगों को दस करोड़ टीके लगाए जाएं। गौरतलब है कि हर व्यक्ति को एक खास अंतराल पर कोरोना के दो टीके लगवाने हैं।  
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स्थानीय मीडिया के मुताबिक संघ प्रशासन ने अपनी जिम्मेदारी महज टीकों को राज्यों को पहुंचाने तक सीमित कर ली है। उसके बाद का सारा काम राज्यों के माथे पर है। जबकि कोरोना वैक्सीन का भंडारण एक बड़ी समस्या है। इसके अलावा इस टीके को लगाने का खास तरीका है, जिसकी पूरी ट्रेनिंग मौजूद स्टाफ को नहीं दी जा सकी है। अमेरिका में अब तक फाइजर और मॉर्डेना कंपनियों के टीकों के इमरजेंसी इस्तेमाल की इजाजत दी गई है। इस वर्ष कुछ और टीकों को यहां अनुमति मिलने की संभावना है। कुछ जानकारों ने कहा है कि उसके बाद टीकाकरण की रफ्तार तेज हो सकती है।

गौरतलब है कि फाइजर के दो टीकों को 21 दिन के अंतराल पर लगाया जाना है। मॉर्डेना के दो टीके 28 दिन के अंतराल पर लगाए जाएंगे। दूसरे टीके की खेप को संघीय प्रशासन ने अब तक अपने पास ही रोक रखा है। उसकी तरफ से कहा गया है कि इनकी आपूर्ति तब की जाएगी, जब उन्हें लगाने का समय आएगा। अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एलर्जी एंड इन्फेक्शियस डिजीजेज के निदेशक एंथनी फाउची ने कहा है कि पहली कोशिश अधिक से अधिक लोगों को पहला टीका लगाने की है। कंपनियां इसी ढंग से टीके का उत्पादन कर रही हैं। फाउची ने कहा कि अगर पहले टीके को सही ढंग से लगाया जाए, तो उससे भी काम चल सकता है, क्योंकि दूसरा टीका रिजर्व टीके के रूप में लगाया जाने वाला है।

टीवी चैनल सीएन की मेडिकल एनालिस्ट डॉ. लीना वेन ने एक कार्यक्रम में कहा कि संघीय सरकार को महीनों पहले टीका लगाने का इन्फ्रास्ट्रक्चर खड़ा कर लेना चाहिए था। उसे इसका पूरा खर्च उठाना चाहिए था। ऐसी सिस्टम होना चाहिए था कि जिससे हर पल पता चल सके कि टीकाकरण की प्रक्रिया कहां ठहरी हुई है। लेकिन टीकों की आपूर्ति का काम भी ठीक से नहीं हो पा रहा है।

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