भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) भूषण रामकृष्ण गवई ने कहा है कि भारतीय संविधान एक जीवंत, जैविक और विकसित होता हुआ दस्तावेज है, जो समय और परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालता है। शुक्रवार को एडिनबर्ग लॉ स्कूल में 'एक विकसित होता हुआ संविधान' विषय पर भाषण देते हुए उन्होंने कहा कि पिछले 75 वर्षों में संविधान में कई बार संशोधन किए गए हैं ताकि बदलते समय की चुनौतियों का सामना किया जा सके।