तरावीह की तैयारियां सड़कों पर न हों, मस्जिदों के भीतर या घरों में हों। मस्जिदों की फर्श क्लोरीन से साफ की जाए, नमाज की चटाइयां भी सैनिटाइज की जाएंगी। एक दूसरे नमाजी के बीच 6 फीट के फासले को ध्याम में रखते हुए कतारें बनाई जाएंगी।
इस सहमति के तहत इन फैसलों को लागू करने के लिए कमेटियां बनाई जाएंगी जो इस बात को सुनिश्चित करेंगी कि नियमों का पालन ठीक से हो रहा है। एक दूसरे से गले मिलने और हाथ मिलाने पर पूरी तरह पाबंदी होगी और मस्जिदों में आने वालों को मास्क पहनना जरूरी होगा। नमाज के दौरान अपने चेहरे को छूने वाले हिस्से से बचा जाएगा।
सहरी और इफ्तार की तैयारियां इस बार मस्जिदों में नहीं होंगी। एतेकाज को भी घर में करें तो बेहतर होगा। तमाम मस्जिद वहां के करीबी पुलिस स्टेशन के संपर्क में रहेंगे और उनका सहयोग करते रहेंगे। मस्जिद प्रबंधन और स्थानीय पुलिस को निर्देश दिए गए हैं कि वो सोशल डिस्टेंसिंग का पूरी तरह पालन करवाएं। सरकार के पास ये हक होगा कि वह इन नियमों के पालन में किसी भी तरह की ढील होने पर और सख्ती कर सके।
जाहिर है, कोरोना के खतरे को देखते हुए ये एक बहुत बड़ी चिंता का विषय था कि आखिर कैसे रमजान के महीने में लोगों को एक दूसरे से दूरी बनाकर रखने को राजी किया जाए और कैसे इसकी पवित्रता बरकरार रखते हुए अवाम की हिफाजत की जा सके। अब ये देखने वाली बात होगी कि मौलाना अपने अपने इलाकों में कितनी सख्ती और बेहतर तरीके से इन निर्देशों का पालन करवा सकते हैं।