ब्रेग्जिट (ब्रिटेन के यूरोपीय संघ से अलगाव) के लिए समझौते में हो रही देरी से पूरे यूरोप की चिंताएं बढ़ती जा रही हैं। जानकारों का कहना है कि अब अगर समझौता हो भी जाता है, तो उसे समयसीमा के भीतर अनुमोदित किया जा सकेगा, इसको लेकर गहरा शक पैदा हो गया है। ये समझौता एक जनवरी 2021 से अमल में आ सके, इसलिए यह जरूरी है कि दोनों पक्ष इसे उसके पहले अनुमोदित कर दें।
यूरोपियन यूनियन (ईयू) की तरफ से अनुमोदन की प्रक्रिया ही बहुत जटिल है। जो समझौता होगा, उसे यूरोपियन काउंसिल में सभी सदस्य देशों का समर्थन मिलना जरूरी होगा। फिर यूरोपीय संसद की मंजूरी आवश्यक होगी। लेकिन उसके पहले समझौते को कानूनी दस्तावेज में परिवर्तित करना होगा।
चूंकि ये एक विशाल समझौता है, इसलिए सभी बातों को कानूनी भाषा में ढालना एक बड़ी चुनौती माना जा रहा है। इस समझौते के तहत उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं, मछली पालन और खेती, उड्डयन, सुरक्षा सहयोग, डेटा नीति, शिक्षा और विज्ञान सभी विषय शामिल होने हैं। अनुमान है कि समझौते का दस्तावेज 1800 पेजों से अधिक का होगा। समझौते के कानूनी दस्तावेज को ईयू में मान्यता प्राप्त 23 भाषाओं में अनुवादित करना होगा। मूल समझौता अंग्रेजी में हो रहा है।
ऐसा माना जा रहा है कि ब्रिटेन में समझौते के अनुमोदन की प्रक्रिया अपेक्षाकृत आसान होगी। इसकी वजह यह है कि ब्रिटिश संसद में प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन की कंजरवेटिव पार्टी को भारी बहुमत हासिल है। ब्रिटिश संसद के नियम के मुताबिक कोई अंतरराष्ट्रीय समझौता संसद में उसके पेश होने के 21 दिन बाद अनुमोदित किया जा सकता है। लेकिन संसद चाहे तो वह इस प्रक्रिया को अधिक तेज गति से निपटा सकती है।
लेकिन मुश्किल यह है कि अभी तक समझौता ही नहीं हो सका है। हालांकि ब्रेग्जिट की समयसीमाएं पहले भी गुजरी हैं। यानी जो तारीख तय हुई थी, उस तक इसे लागू करने की सूरत नहीं बन सकी। तो अब सवाल पूछा जाने लगा है कि क्या एक बार फिर समयसीमा गुजर जाएगी? अगले एक जनवरी से ब्रेग्जिट अमल में आ जाए, इसके लिए अभी चल रही वार्ता के पूरा होने की समयसीमा पहले 31 अक्टूबर 2020 रखी गई थी। लेकिन तब तक सहमति नहीं बनी, तो 15 नवंबर तक इसे पूरा करने का लक्ष्य रखा गया। लेकिन अब नवंबर गुजर रहा है और अभी तक कई अहम मसलों पर दोनों पक्षों में सहमति नहीं बनी है।
जिन मुद्दों पर मतभेद कायम है, उनमें शामिल है- समुद्र में मछली मारने का अधिकार, भविष्य में दोनों पक्षों के बीच व्यापारिक प्रतिस्पर्धा की क्या शर्तें होंगी और समझौते को लागू करने की प्रक्रियाएं क्या होंगी। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उरसुला वॉन डेर लियेन ने कहा है कि ब्रेग्जिट समझौते के लिए अब निर्णायक वक्त आ गया है। लेकिन ये सवाल कायम है कि अगर मतभेद दूर नहीं हुए और समयसीमा के भीतर समझौते पर दस्तखत ना हो पाए, तो क्या होगा।
बोरिस जॉनसन सरकार कह चुकी है कि अब वह समयसीमा को नहीं बढ़ाएगी, भले उसे ‘नो डील ब्रेग्जिट’ करना पड़े। ‘नो डील ब्रेग्जिट’ का मतलब है कि ब्रिटेन बिना समझौते के ईयू से अपने को अलग कर लेगा। लेकिन उस हाल में दोनों पक्षों में व्यापार और अन्य सभी प्रकार के संबंधों का क्या स्वरूप होगा, यह किसी को नहीं मालूम है।
जानकारों का कहना है कि उस स्थिति में ब्रिटेन को काफी क्षति होगी। उसके हाथ से यूरोप का पूरा बाजार निकल जाएगा। साथ ही मछली मारने के समुद्री क्षेत्र आदि को लेकर ईयू से टकराव बना रहेगा। लेकिन इसका असर बाकी यूरोप और दुनिया को भी होगा। ईयू बहुत बड़ा बाजार है। उसके कारोबार में आने वाली दिक्कतों का असर बाकी दुनिया में भी महसूस किया जाएगा।