फेसबुक की बाहरी विशेषज्ञों की समिति ने इस सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को वह ऑनलाइन पोस्ट बहाल करने का आदेश दिया है, जिसमें फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को शैतान बताया गया है। साथ ही इस पोस्ट में मुसलमानों से एक विवादास्पद अपील की गई है। कुछ लोगों की राय है कि यह हिंसा का सहारा लेने की अपील है। लेकिन शुक्रवार को निगरानी बोर्ड ने इस पोस्ट को बहाल करने का आदेश दे दिया।
ओवरसाइट बोर्ड नाम की ये संस्था 40 विधि और मानव अधिकार विशेषज्ञों को लेकर बनी है। इस संस्था के पास यह तय करने का अधिकार है कि किन ऑनलाइन पोस्ट को फेसबुक कंपनी अपने सोशल मीडिया फ्लेटफॉर्म से हटा सकती है। इस मामले में ओवरसाइट बोर्ड ने कहा कि फेसबुक ने संबंधित पोस्ट को हटाने में अति उत्साह दिखाया। ये पोस्ट इंडियन मुस्लिम्स नाम के एक ऑनलाइन ग्रुप ने पोस्ट किया था। बोर्ड ने कहा कि हालांकि ये पोस्ट भड़काऊ है, लेकिन इससे किसी हिंसा का खतरा पैदा नहीं होता। इस पोस्ट को हटाने का मतलब लोगों की ऑनलाइन अभिव्यक्ति की वैधानिक आजादी पर अनुचित प्रतिबंध लगाना है।
ओवरसाइट बोर्ड के पास जाने वाला यह ऐसा सातवां मामला था। इनमें से छह बार ओवरसाइट बोर्ड ने पोस्ट हटाने के खिलाफ फैसला दिया है। अब ये बोर्ड पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को प्रतिबंधित करने के मामले पर विचार कर रहा है। इस मामले में फैसला मार्च के अंत तक आने की संभावना है।
शुक्रवार को जिस मामले में फैसला दिया गया, उसका संबंध पिछले अक्तूबर में डाले गए एक पोस्ट से है। इसमें एक मीम डाला गया था, जिससे यह संकेत उभरता था कि जो लोग पैगंबर मोहम्मद की आलोचना करते हैं, उनके खिलाफ हिंसा की जाए। इसमें एक हैशटैग शामिल था, जिसमें राष्ट्रपति मैक्रों को शैतान बताया गया था। साथ ही फ्रांस में उत्पादित वस्तुओं के बहिष्कार की अपील की गई थी।
इस पर अपने फैसले में फेसबुक ने कहा था कि ये पोस्ट उसके कम्युनिटी स्टैंडर्ड का उल्लंघन करता है। इसमें हिंसा के लिए उकसाया गया है। लेकिन ओवरसाइट बोर्ड के सामने फेसबुक ने कहा कि वैध धार्मिक अभिव्यक्ति और हिंसा के संभावित खतरे के बीच हमेशा एक तनाव रहता है। ओवरसाइट बोर्ड ने अपने बहुमत के आधार पर अपना फैसला दिया है। ये ओवरसाइट ग्रुप फेसबुक की फंडिंग से ही चलता है। अपने फैसले में बोर्ड ने कहा- ‘बहुमत की राय बनी है कि इस पोस्ट के मामले में फेसबुक ने संदर्भ से जुड़ी सभी सूचनाओं और अभिव्यक्ति के बारे में अंतरराष्ट्रीय मानव अधिकार मानकों का सही जायजा नहीं लिया।’ फेसबुक ने कहा है कि वह बोर्ड के फैसले की समीक्षा करेगा और सात दिन के अंदर पोस्ट को बहाल कर देगा।
ओवरसाइट बोर्ड ने कहा है कि इस पोस्ट से किसी को नुकसान पहुंचने की संभावना नहीं है। उसने यह राय भी जताई है कि फेसबुक मुसलमानों को निशाना बनाने वाले या उनकी तरफ से डाले जाने वाले पोस्ट के हेट स्पीच होने को लेकर जरूरत से ज्यादा संवेदनशील है। बोर्ड ने फेसबुक कंपनी से कहा है कि वह अपने यूजर्स को इस बारे में अतिरिक्त सूचनाएं उपलब्ध कराए कि वह हिंसा के संभावित खतरों को लेकर अपने ऑनलाइन मानकों को किस तरह लागू करती है।
ओवरसाइट बोर्ड की जिम्मेदारी यह तय करने में फेसबुक की मदद करना है कि कौन से पोस्ट कंपनी की कंटेंट नीति का उल्लंघन करते हैं। वैसे फिलहाल बोर्ड के पास सिर्फ उन पोस्ट्स की ही समीक्षा करने का अधिकार है, जिन्हें फेसबुक ने डिलीट कर दिया हो। इसलिए आलोचकों का कहना है कि इस बोर्ड को ऐसे पर्याप्त अधिकार नहीं दिए गए हैं, जिससे वह फेसबुक के तौर-तरीकों में कोई सार्थक बदलाव ला सके।