अजरबैजान दूतावास में खोजाली नरसंहार में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि दी गई। इस दौरान भारत में अजरबैजान के राजदूत डॉ. अशरफ शिखालियेव ने 25-26 फरवरी 1992 की ठंड और बर्फीली रात में अर्मेनियाई सशस्त्र बलों की ओर से किए गए सामूहिक नरसंहार के संबंध में जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि इस नरसंहार में 613 लोगों की मौत हुई थी। यह मानव जाति के इतिहास में सबसे बर्बर और क्रूर अपराधों में से एक है।
अजरबैजान के राजदूत ने राजनीतिक प्रतिनिधियों, मीडिया के प्रतिनिधियों और भारत के सांस्कृतिक और शैक्षणिक हलकों से जुड़े लोगों को त्रासदी के बारे में बताते हुए कहा कि 25-26 फरवरी 1992 की रात अर्मेनियाई सशस्त्र बलों ने खोजाली शहर की शांतिपूर्ण आबादी का नरसंहार किया। यह कार्रवाई सोवियत सेना की मदद से की गई। इस दौरान 7,000 लोगों की आबादी वाले इस शहर को जमींदोज कर दिया गया। यहां रहने वाले लोगों का नरसंहार किया गया।
अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानूनों सहित विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय कानूनों व सिद्धांतों की उपेक्षा करते हुए आम लोगों विशेष रूप से वृद्धों, महिलाओं और बच्चों की निर्दयी रूप से हत्या की गई। इस दौरान 106 महिलाओं, 63 बच्चों और 70 वृद्धों समेत कुल 613 लोगों को क्रूरता के साथ मार दिया गया। इस नरसंहार में आठ परिवारों को पूरी तरह से मिटा दिया गया। 25 बच्चों ने माता-पिता दोनों को खो दिए, 132 बच्चों ने अपने माता-पिता में से एक को खो दिया। नरसंहार के दौरान 487 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। 1275 लोगों को बंधक बना लिया गया और उनमें से 150 अब भी अज्ञात हैं। नरसंहार के दौरान अभूतपूर्व क्रूरता के साथ 56 लोगों की हत्या की गई। लोगों को जिंदा जला दिया गया और भयानक यातना दी गई।
अजरबैजान के राजदूत डॉ. अशरफ शिखालियेव ने बताया कि पहली बार राष्ट्रीय नेता हेदर अलीयेव की पहल पर अजरबैजान की संसद ने 26 फरवरी को हुए खोजाली नरसंहार का राजनीतिक और कानूनी मूल्यांकन किया और इस दिन को "खोजाली नरसंहार दिवस" घोषित किया।
खोजाली के बारे में सच्चाई को अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के ध्यान में लाने के लिए हेदर अलीयेव फाउंडेशन द्वारा आयोजित अंतर्राष्ट्रीय अभियान "जस्टिस फॉर खोजाली" विश्व समुदाय की ओर से खोजाली में हुई घटना को नरसंहार की मान्यता देने और इसे कानूनी और राजनीतिक मूल्यांकन देने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
इस कार्रवाई के परिणामस्वरूप 17 देशों के विधायी निकायों के साथ-साथ संयुक्त राज्य अमेरिका के 24 राज्यों, इस्लामी सहयोग संगठन और तुर्क राज्यों के संगठन ने खोजाली में नागरिकों के नरसंहार की निंदा करने वाले कई प्रस्तावों और निर्णयों को अपनाया है। इसका नरसंहार और मानवता के खिलाफ अपराध के रूप में मूल्यांकन किया गया है।
भारत में अज़रबैजान के राजदूत डॉ अशरफ शिखालियेव ने आगे भारत और अज़रबैजान के बीच संबंधों की वर्तमान स्थिति पर भी बात की और कहा कि दोनों देशों के आर्थिक संबंध मजबूत हो रहे हैं। दोनों में बड़ी संख्या में लोगों का आना-जाना है। अज़रबैजान और भारत के शहरों के बीच सीधी उड़ानें अप्रैल 2023 में फिर से शुरू की जाएंगी इससे द्विपक्षीय संबंध और मजबूत होंगे।
उन्होंने कहा कि आज अज़रबैजान भारतीय यात्रियों के लिए एक प्रचलित पर्यटन स्थल के रूप में उभर रहा है। भारतीय पर्यटन कंपनियां 'लैंड ऑफ फायर' अजरबैजान में तेजी से अपने प्रतिनिधि कार्यालय खोल रही हैं। भारतीय फिल्म निर्माण कंपनियां भी इस शानदार, रहस्यमयी और प्राचीन 'लैंड ऑफ फायर' में अपनी फिल्मों की शूटिंग करने की इच्छुक हैं। कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों ने अज़रबैजान में पर्यटन आकर्षणों पर शॉर्ट वीडियोज भी देखे।