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कश्मीर पर भारतीय स्तंभकार ने सुनाई आपबीती, कहा- दादा करना चाहते थे मेरा कत्ल

Sat, 16 Nov 2019 05:25 AM IST
Sneha Baluni वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन

सार

  • अमेरिकी संसद में स्तंभकार सुनंदा ने जोरदार लहजे में रखा भारत का पक्ष
  • कहा, हमारी सभ्यता पांच हजार साल पुरानी, कश्मीर बिना अधूरा है भारत
  • मानवता के रक्षक उस वक्त कहां थे, जब हमारे अधिकार छीने जा रहे थे
  • आतंकियों से बचाने के लिए कुल्हाड़ी लेकर मेरी हत्या को तैयार थे दादा जी
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सुनंदा वशिष्ठ (फाइल फोटो) - फोटो : ANI
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विस्तार
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अमेरिकी संसद में जम्मू-कश्मीर में मानवाधिकार के हालात पर चल रही सुनवाई में भारत की वरिष्ठ स्तंभकार सुनंदा वशिष्ठ ने पाकिस्तान को करारा जवाब दिया है। उन्होंने पाक पर निशाना साधते हुए कहा, कश्मीर उस वक्त से इस्लामिक स्टेट (आईएस) जैसे बर्बर आतंक का मुकाबला कर रहा है, जब पश्चिमी देशों को आतंक के बारे में कुछ भी नहीं पता था। उन्होंने कहा, भारत ने कश्मीर पर कभी कब्जा नहीं किया। यह भारत का ही अंग था और है। पाकिस्तान की तरह भारत की पहचान 70 साल पुरानी नहीं है। 5000 साल पुरानी सभ्यता होने के नाते कश्मीर के बिना भारत नहीं और भारत के बिना कोई कश्मीर नहीं है।

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टॉम लैंटन मानवाधिकार आयोग के समक्ष सुनंदा ने 1990 में कश्मीरी पंडितों को राज्य से निकाले जाने के वाकये को याद करते हुए कहा, मुझे खुशी है कि कश्मीर पर अमेरिकी कांग्रेस में सुनवाई हो रही है, क्योंकि जब मैंने और मेरे परिवार ने अपना घर खोया, तब पूरी दुनिया चुप रही थी।

जब हमारे अधिकार छीने जा रहे थे, तब मानवाधिकार के पैरोकार कहां थे? मानवता के रक्षक उस वक्त कहां थे, जब मेरे बेहद कमजोर दादा अपने हाथ में रसोई में इस्तेमाल होने वाले चाकू और जंग लगी एक पुरानी कुल्हाड़ी लिए मुझे और मेरी मां को मार डालने के लिए तत्पर खड़े थे, ताकि हमें आतंकियों की हैवानियत से बचाया जा सके। सभी मौतें पाकिस्तान द्वारा प्रशिक्षित किए गए आतंकियों की वजह से हो रही थीं।
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इस दोहरे मानदंडों से भारत को किसी भी तरह की कोई मदद नहीं मिल रही है। सुनंदा ने कहा, भारत की लोकतांत्रिक साख काफी ऊंची है। हमने पंजाब और पूर्वोत्तर राज्यों में आतंकवाद को हराया है। अब समय है कि कश्मीर के आतंकवाद को हराने के लिए भारत को मजबूती दी जाए।

चार लाख कश्मीरी हिंदू उस दहशत की रात में घर छोड़कर भागने को मजबूर हुए

सुनंदा ने कहा, 1990 में कश्मीरी पंडितों को जब निकाला जा रहा था तो उन्हें तीन विकल्प दिए गए-भाग जाओ, धर्म परिवर्तन करा लो या मर जाओ। करीब 4 लाख कश्मीरी हिंदू उस दहशत की रात में अपना घर छोड़कर भागने के लिए मजबूर हुए थे। आज 30 साल बाद भी मैं अपने घर नहीं लौट सकती। कश्मीर में मेरे और मेरे समुदाय के लोगों के घर पर अवैध कब्जे हैं। जो लोग घर छोड़कर नहीं भागे थे, वे या तो मार दिए गए या लूट लिए गए।


कश्मीर में जनमत संग्रह कभी नहीं

कश्मीर में जनमत संग्रह के सवाल पर सुनंदा ने कहा, यह तभी संभव है जब सभी समुदाय फैसले के लिए साथ जुटें, लेकिन कश्मीर का एक हिस्सा भारत के साथ है, दूसरे पर पाकिस्तान का कब्जा है और एक हिस्से पर चीन ने अवैध हक जता रखा है। ऐसे में कश्मीर में कभी जनमत संग्रह नहीं हो सकता।

कश्मीर में मौतों का कारण पाक के आतंकी

जम्मू कश्मीर में पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद को मौतों की वजह बताते हुए सुनंदा ने कहा, वैश्विक समुदाय का दोहरा रवैया भारत की कोई मदद नहीं कर रहा। उन्होंने कहा कि वैश्विक समुदाय को आतंकवाद के खात्मे में भारत की मदद करनी होगी, तभी मानवाधिकार के हालात सुधरेंगे।

 

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अमेरिकी सांसदों को कश्मीर दौरा करने दिया जाए: शीला जैक्सन

टेक्सास से कांग्रेस सदस्य शीला जैक्सन ली ने कहा कि भारत को क्षेत्र में लोगों के मानवाधिकार लौटाने पर काम करना होगा। क्यों न अमेरिकी कांग्रेस के कुछ सदस्यों को भारत और पाकिस्तान की तरफ के कश्मीर का दौरा करने दिया जाए।

वहीं, इससे पहले मानवाधिकार वकील युसरा वाई. फजीली ने कहा, कश्मीर में डर का माहौल है और छापों के बाद हिरासत में लिए गए लोगों में उनके रिश्तेदार भी शामिल थे। उन्होंने बताया, सशस्त्र सेनाओं ने रात में घरों पर छापे मारे और युवकों और लड़कों को हिरासत में ले लिया।

मेरे एक रिश्तेदार को भी इसी तरह रात में मारे गए छापे के दौरान हिरासत में लिया गया। वह राजनेता नहीं है, स्वतंत्रता सेनानी भी नहीं है, पत्थर फेंकने वाला भी नहीं है, वह सिर्फ एक व्यवसायी है।

निर्मला ने की तारीफ

कश्मीर पर अमेरिकी संसद में सुनंदा के तर्कों की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जमकर तारीफ की है। उन्होंने ट्वीट किया, बहुत अच्छे सुनंदा वशिष्ठ, आप उनकी आवाज हैं जिनकी सुनी जानी चाहिए. मानवाधिकारों की सीमा तय नहीं की जा सकती।
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