फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

CJI: मध्यस्थता प्रक्रिया में घरेलू अदालतों के बढ़ते दखल की आशंका पर बोले सीजेआई, समान व्यवहार करती है न्यायपालिका

Tue, 21 Jun 2022 05:40 PM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बर्लिन

सार

सीजेआई ने कहा, "भारतीय अदालतें मूल देश के आधार पर भेदभाव नहीं करती हैं। भारत में अदालतों के समक्ष सभी समान हैं। भारतीय अदालतों ने समय के साथ विवादों की मध्यस्थता के लिए व्यापक गुंजाइश की अनुमति दी है।"
विज्ञापन
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया एनवी रमना - फोटो : ANI
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) एन.वी. रमना ने मंगलवार को मध्यस्थता प्रक्रिया में घरेलू अदालतों के बढ़ते हस्तक्षेप के बारे में आशंका को दूर किया और कहा कि भारतीय न्यायपालिका विदेशी संस्थाओं सहित सभी पक्षों के साथ समान और न्यायसंगत रूप से व्यवहार करती है।
विज्ञापन


सीजेआई ने कहा कि हाल के वर्षों में मध्यस्थता प्रक्रिया में घरेलू अदालतों के बढ़ते हस्तक्षेप के बारे में पक्षों के मन में कुछ आशंका है। मैं आपको विश्वास दिलाता हूं, भारतीय अदालतों को उनके मध्यस्थता के पक्ष में जाना जाता है। भारत में न्यायपालिका मध्यस्थता का समर्थन करती है और न्याय निर्णय के मूल हिस्से को स्वयं मध्यस्थ न्यायाधिकरण (आर्बिट्रल ट्रिब्यूनल) पर छोड़ देती है।

सीजेआई रमना जर्मनी के डॉर्टमुंड में इंडो जर्मन चैंबर ऑफ कॉमर्स की वार्षिक बैठक में 'आर्बिट्रेशन इन ए ग्लोब्लाइज्ड वर्ल्ड- द इंडियन एक्सप्रीयंस' विषय पर बोल रहे थे।
विज्ञापन


उन्होंने कहा कि भारतीय न्यायपालिका को कानून के शासन को सर्वोपरि महत्व देने के लिए मान्यता हासिल है। दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में न्यायपालिका हमेशा संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करती है। आप पूर्ण स्वतंत्रता और सभी पक्षों के साथ समान और न्यायसंगत व्यवहार करने की अंतर्निहित संवैधानिक शक्ति के लिए भारतीय न्यायपालिका पर भरोसा कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि भारत की संवैधानिक अदालतों (सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट) को सरकार के प्रत्येक कार्य की न्यायिक समीक्षा करने का अधिकार है। उन्होंने बताया कि वे उस किसी भी कानून को रद्द कर सकते हैं जो संवैधानिक सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है। वे कार्यपालिका के मनमाने उपायों को भी दरकिनार कर सकते हैं।

रमना ने कहा कि भारतीय संविधान, किसी भी व्यक्ति या संस्था को शिकायतों के निवारण के लिए भारत में किसी भी कानूनी मंच से संपर्क करने में सक्षम बनाता है। जिसमें विदेशी संस्था भी शामिल है।

सीजेआई ने कहा, "भारतीय अदालतें मूल देश के आधार पर भेदभाव नहीं करती हैं। भारत में अदालतों के समक्ष सभी समान हैं। भारतीय अदालतों ने समय के साथ विवादों की मध्यस्थता के लिए व्यापक गुंजाइश की अनुमति दी है।"

उन्होंने कहा, "भारतीय अदालतों के इस रवैये ने अंतर्राष्ट्रीय मध्यस्थता के महत्व को और बढ़ा दिया है, खासकर जब भारत और जर्मनी जैसे देशों की बात आती है।"

उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी हस्तांतरण समझौते, लाइसेंसिंग अधिकार, रॉयल्टी अधिकार और ऐसे अन्य आईपीआर से संबंधित समझौते अक्सर कॉरपोरेट्स के बीच मध्यस्थता समझौतों के विषय होते हैं।

सीजेआई रमना ने कहा कि वाणिज्यिक विवादों के तेजी से निपटान के लिए संसद ने वाणिज्यिक न्यायालय अधिनियम भी बनाया है, जो वाणिज्यिक मामलों के लिए समर्पित पीठों की स्थापना का प्रावधान करता है।

इससे वाणिज्यिक मामलों में न्याय को और अधिक सुव्यवस्थित और त्वरित किया गया है। उन्होंने कहा कि लंबे समय से लंबित वाणिज्यिक विवादों को समाप्त करने के लिए भारतीय विधायिका के कानूनों में संशोधन के उदाहरण हैं।
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें