मस्तिष्क में एक सर्किट होती है जो खुशी और पीड़ा के बीच संतुलन बनाकर रखती है। शरीर के किसी अंग में दर्द होने पर यही सर्किट उस दर्द को कम करने में अहम भूमिका निभाती है। ये सब जब मस्तिष्क के नियंत्रण से बाहर हो जाता है तब व्यक्ति मानसिक रोग जैसे अवसाद और चिंता से ग्रस्त हो जाता है। मस्तिष्क में इस तरह की सर्किट का खुलासा अमेरिका के कोल्ड स्प्रिंग हार्बर लैबोरेटरी के शोध में हुआ है जो हाल ही न्यूरॉन जर्नल में प्रकाशित हुआ है।
वैज्ञानिकों ने चूहों पर अध्ययन किया। इसमें चूहे को पानी पीने और हवा की आवाज को पहचाने का प्रशिक्षण दिया गया। इसके बाद तकनीक के जरिए चूहे के मस्तिष्क के वेंट्रल पैलिडम की निगरानी की गई। इसमें पता चला कि तंत्रिका तंत्र जो गाबा नाम के संदेशवाहक केमिकल छोड़ती है। इसी से चूहे के दिमाग के भीतर पानी पीने की उत्सुकता और खुशी देखी गई। इसी आधार पर बो ली का दावा है कि तनाव और अवसाद से ग्रसित लोगों के स्वभाग में बदलाव का कारण इस सर्किट में बदलाव होना होता है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि सम्मान और सजा को लेकर व्यक्ति जब चीजों को समझता है और उसका जवाब देता है तो इसमें दिमाग के वेंट्रल पैलिडम की अहम भूमिका होती है। इसी तरह पशु को कुछ चाहिए जैसे पानी या खाना या वे किसी तरह की सजा से बचना चाहता है तो उसके दिमाग का ये हिस्सा (वेंट्रल पैलिडम) सक्रिय हो जाता है।
वैज्ञानिकों ने मस्तिष्क की इस क्रिया को समझने के लिए विशेष प्रकार के उपकरणों का प्रयोग किया जिससे एक-एक कोशिका का अध्ययन किया और उनकी पहचान की गई कि मस्तिष्क की दूसरी कोशिकाओं से वे कैसे भिन्न हैं।